ईरान में नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई की नियुक्ति के बाद हालात तेजी से बदल रहे हैं। निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने चल रहे ‘लायन एंड सन रेवोल्यूशन’ में ईरान के लोगों के संघर्ष की तारीफ की। इसके साथ ही उन्होंने सेना से सरकार का साथ छोड़कर जनता के साथ आने की अपील की। दूसरी तरफ ईरान सरकार ने विदेश में रहने वाले अपने नागरिकों के लिए सख्त चेतावनी जारी की और नया नियम लागू करने की बात कही।

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प्रिंस रेजा पहलवी का सेना से आह्वान

10 मार्च 2026 को प्रिंस रेजा पहलवी ने बयान जारी कर प्रदर्शनकारियों की तारीफ की। उन्होंने एक फायरफाइटर का उदाहरण दिया जिसकी जान एक घायल प्रदर्शनकारी को बचाते हुए गई थी। उन्होंने ईरान की सेना और सुरक्षा बलों से हथियार डालकर जनता के साथ आने को कहा। उन्होंने भरोसा दिया कि नए और आज़ाद ईरान में उन्हें जगह मिलेगी। इसके अलावा उन्होंने अमेरिका और इज़राइल के उस कदम का समर्थन किया जिसमें ईरान के सैन्य ढांचे को खत्म करने की बात कही गई है। प्रिंस ने नए नेतृत्व पर आम लोगों को ढाल के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया और इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया।

प्रवासियों के लिए सरकार का नया नियम

इस बीच ईरान के अभियोजक जनरल के कार्यालय ने चेतावनी दी कि वह उन ईरानी नागरिकों की संपत्ति और संपत्तियां जब्त करेगा जो विदेश में रहते हैं और अमेरिका या इज़राइल की सैन्य कार्रवाई का समर्थन या सहानुभूति रखते हैं। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया में रहने वाले प्रवासी ईरानी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल ही में टोरंटो और लॉस एंजिल्स में 3.5 लाख लोग और म्यूनिख में 2.5 लाख लोग ‘लायन एंड सन रेवोल्यूशन’ के समर्थन में सड़कों पर उतरे।

नया नेतृत्व और दुनिया की प्रतिक्रिया

28 फरवरी 2026 को अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद 88 सदस्यों वाले ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने 56 वर्षीय मुज्तबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना। वह अब देश के सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ भी बन गए हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय और दुनियाभर के राजनयिकों ने उनकी नियुक्ति का समर्थन किया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस नियुक्ति को अस्वीकार्य बताया और कहा कि अमेरिका की सहमति के बिना नियुक्त नेता ज्यादा दिन नहीं टिकेगा। वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मुज्तबा खामेनेई को बधाई दी। इसके अलावा ईरान की राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टीम की 5 खिलाड़ियों ने भी हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में शरण ली और इस क्रांति का समर्थन किया।