ईरान पर लग सकते हैं कड़े प्रतिबंध, 40 देशों ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होने पर जताई कड़ी नाराज़गी.
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से वैश्विक व्यापार पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. ब्रिटेन की विदेश मंत्री Yvette Cooper ने 40 से अधिक देशों के साथ बैठक कर ईरान को सख्त संदेश दिया है. अगर यह समुद्री रास्ता बंद रहता है, तो ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा. इस रास्ते के बंद होने से दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ने की संभावना जताई गई है.
बैठक में किन मुख्य बातों पर हुई चर्चा और क्या है देशों की मांग?
ब्रिटेन द्वारा बुलाई गई इस बैठक में 40 से ज़्यादा देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. इसमें फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूएई और बहरीन जैसे देश शामिल थे. देशों का कहना है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री स्वतंत्रता का सम्मान करे. चर्चा के दौरान निम्नलिखित मुख्य बिंदु सामने आए:
- सभी देशों ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को तुरंत और बिना शर्त खोलने की मांग की है.
- ईरान पर दबाव बनाने के लिए सामूहिक आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंधों पर विचार किया जा रहा है.
- ब्रिटिश विदेश मंत्री के अनुसार ईरान वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर रहा है.
- बैठक में फिलहाल सैन्य दखल के बजाय कूटनीतिक रास्तों और आर्थिक दबाव पर ध्यान केंद्रित किया गया है.
प्रमुख नेताओं और देशों का क्या है इस संकट पर रुख?
इस संकट पर दुनिया के अलग-अलग देशों की राय बंटी हुई है. एक तरफ जहाँ पश्चिमी देश प्रतिबंधों की बात कर रहे हैं, वहीं ईरान अपने नए नियमों की बात कर रहा है. नीचे दी गई तालिका में अलग-अलग पक्षों के बयान दिए गए हैं जिससे स्थिति को समझा जा सकता है:
| नेता या संस्था | मुख्य बयान और रुख |
|---|---|
| Donald Trump (अमेरिकी राष्ट्रपति) | हॉर्मुज़ की सुरक्षा सिर्फ अमेरिका की ज़िम्मेदारी नहीं है, तेल पर निर्भर देश खुद आगे आएं. |
| GCC (खाड़ी सहयोग परिषद) | संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से हॉर्मुज़ की सुरक्षा के लिए बल प्रयोग की अनुमति मांगी. |
| Mao Ning (चीनी प्रवक्ता) | इस संकट की मुख्य वजह अमेरिका और इजरायल की ईरान के खिलाफ सैन्य गतिविधियां हैं. |
| Ebrahim Azizi (ईरान) | रास्ता केवल उन्हीं के लिए खुलेगा जो ईरान के नए कानूनों का पालन करेंगे. |
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य फरवरी के अंत से ही काफी हद तक बंद है जिससे जहाज़ों की आवाजाही ठप हो गई है. पिछले कुछ हफ्तों में समुद्र में कई हमले हुए हैं जिनमें कई नाविकों की जान जा चुकी है. सैन्य योजनाकार अगले हफ्ते फिर से बैठक करेंगे ताकि सुरक्षा व्यवस्था और खदानों को साफ करने पर चर्चा की जा सके.




