ईरान के विदेश मंत्री Seyyed Abbas Araghchi और सऊदी अरब के विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan के बीच फोन पर बातचीत हुई है। यह चर्चा 11 मई 2026 को हुई और खास बात यह है कि पिछले 24 घंटों के भीतर दोनों मंत्रियों ने दूसरी बार एक-दूसरे से बात की। इस बातचीत का मुख्य मकसद इलाके के मौजूदा हालात और अमेरिका के साथ चल रही राजनयिक प्रक्रिया पर चर्चा करना था।
🚨: Strait of Hormuz में ड्रोन अटैक, कोरियाई जहाज पर हुआ हमला, UAE सरकार ने जताई कड़ी नाराजगी।
ईरान और अमेरिका के बीच क्या चल रहा है विवाद?
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। 10 मई को ईरान ने अमेरिका के एक प्रस्ताव का जवाब भेजा था, जिसमें युद्ध खत्म करने की बात थी। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान की इन शर्तों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। ट्रंप ने इस प्रस्ताव को ‘बिल्कुल अस्वीकार्य’ बताया और आरोप लगाया कि ईरान केवल समय बर्बाद कर रहा है और खेल खेल रहा है।
ईरान ने अमेरिका के सामने क्या शर्तें रखी थीं?
अमेरिका ने एक पन्ने का 14 सूत्रीय मेमोरेंडम भेजा था, जिसके जवाब में ईरान ने अपनी कुछ मांगें रखी थीं। ईरान की मुख्य मांगें इस प्रकार थीं:
- दुश्मनी और हमलों को तुरंत खत्म किया जाए।
- ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में बड़ी राहत दी जाए।
- ईरान के जो पैसे विदेशों में जमे हुए हैं, उन्हें वापस किया जाए।
- भविष्य में फिर से हमले न होने की गारंटी दी जाए।
- परमाणु समझौतों पर धीरे-धीरे काम करने की सहमति हो।
Strait of Hormuz और तेल बाजार पर क्या है असर?
क्षेत्र में तनाव तब बढ़ा जब 28 फरवरी को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने Strait of Hormuz को बंद कर दिया था। हालांकि, 8 अप्रैल को पाकिस्तान की मदद से एक युद्धविराम (Ceasefire) हुआ, जिसे बाद में राष्ट्रपति ट्रंप ने बढ़ा दिया। इस तनाव की वजह से तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया और जहाजों के बीमा का खर्चा भी बढ़ गया। सऊदी अरब ने साफ किया है कि वह इस रास्ते को खोलने के लिए अमेरिकी हमलों में शामिल नहीं होगा। वहीं, ईरान ने अब इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की जांच करने और टैक्स वसूलने के लिए एक सरकारी एजेंसी भी बना ली है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों ने क्यों बात की?
दोनों मंत्रियों ने regional developments और ईरान तथा अमेरिका के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही राजनयिक बातचीत पर चर्चा करने के लिए फोन पर बात की।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को क्यों नकारा?
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के जवाबी प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया क्योंकि उन्हें लगा कि ईरान बातचीत को लंबा खींच रहा है और शर्तें मानने में आनाकानी कर रहा है।
