UN में उठा ईरान के स्कूल पर मिसाइल हमले का मुद्दा, 170 से ज्यादा बच्चों की मौत पर मांगी गई जवाबदेही
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में 27 मार्च 2026 को ईरान के मीनाब में एक स्कूल पर हुए हमले को लेकर बड़ी चर्चा हुई। इस बैठक में एक ईरानी मां ने अपने बच्चों को खोने का दर्द बयां किया। यह हमला युद्ध के पहले दिन यानी 28 फरवरी 2026 को हुआ था, जिसमें भारी संख्या में स्कूली बच्चों की जान गई थी। अब इस मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र जांच की मांग तेज हो गई है और दुनिया भर के देशों ने इस पर चिंता जताई है।
UN की बैठक में क्या बातें सामने आईं?
ईरान, चीन और क्यूबा के अनुरोध पर बुलाई गई इस आपातकालीन चर्चा में कई देशों ने हिस्सा लिया। हमले में अपने दो बच्चों को खोने वाली Mohaddeseh Fallahat ने वीडियो लिंक के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने आखिरी बार अपने बच्चों को स्कूल जाते समय जिंदा देखा था। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख Volker Turk ने इस घटना पर गहरा दुख जताया और कहा कि किसी भी देश का आपसी विवाद बच्चों की जान लेकर हल नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है ताकि दोषियों की पहचान हो सके।
हमले के बारे में मुख्य जानकारी और नुकसान
मीनाब के Shajareh Tayyebeh गर्ल्स स्कूल पर 28 फरवरी को मिसाइल गिरी थी। शुरुआती जांच रिपोर्टों के मुताबिक, यह एक अमेरिकी Tomahawk मिसाइल थी जो गलत खुफिया जानकारी या निशाने की गलती की वजह से स्कूल पर गिर गई। इस हमले में हुए नुकसान का विवरण नीचे दी गई टेबल में देखा जा सकता है:
| विवरण | संख्या और जानकारी |
|---|---|
| कुल मौतें | लगभग 168 से 175 लोग |
| मृतक कौन थे | 7 से 12 साल की लड़कियां, टीचर और स्टाफ |
| घायलों की संख्या | 95 से 100 लोग |
| हमले का कारण | संभावित टारगेट की गलती |
| मिसाइल का प्रकार | US Tomahawk क्रूज मिसाइल |
संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत Farida Shaheed ने कहा कि स्कूल को सटीक मिसाइल से निशाना बनाया गया, जो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन हो सकता है। Amnesty International और UNESCO ने भी इसे एक गंभीर अपराध बताते हुए जांच की मांग की है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने इसे युद्ध अपराध करार दिया और कहा कि यह कोई गलती नहीं बल्कि जानबूझकर किया गया हमला था।




