ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ ने लेबनान में युद्धविराम को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने हिजबुल्लाह को ‘बहादुर’ बताते हुए कहा कि लेबनान में पूरी तरह शांति लाने और इसे लागू करने में इस संगठन की भूमिका बहुत अहम होगी। गालिबाफ ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए उसे अपनी गलतियाँ सुधारने और समझौते का पालन करने की सलाह दी है।

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लेबनान युद्धविराम पर अलग-अलग देशों का क्या कहना है?

इस मामले में ईरान और अमेरिका की राय एकदम अलग है। ईरान का कहना है कि लेबनान के दक्षिणी हिस्से समेत पूरे इलाके में युद्धविराम पूरी तरह लागू होना चाहिए। दूसरी तरफ, अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि लेबनान को इस समझौते में शामिल करना एक गलतफहमी थी और अमेरिका ने ऐसा कोई वादा नहीं किया था। अमेरिका चाहता है कि लेबनान और इसराइल आपस में बात करके फैसला करें।

इसराइल और हिजबुल्लाह का क्या स्टैंड है?

इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिया है कि वे ज़रूरत पड़ने पर हिजबुल्लाह पर हमला जारी रखेंगे और उनके अनुसार लेबनान इस युद्धविराम का हिस्सा नहीं है। वहीं हिजबुल्लाह ने साफ़ किया है कि वे शांति की कोशिशों का मौका दे रहे हैं लेकिन इसराइल के हमलों को अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे। पाकिस्तान ने इस पूरे विवाद में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।

विवाद और समझौतों की मुख्य बातें

पक्ष मुख्य स्टैंड/भूमिका
ईरान लेबनान में पूर्ण युद्धविराम की मांग और हिजबुल्लाह का समर्थन
अमेरिका लेबनान को समझौते से बाहर रखने की बात कही
इसराइल ज़रूरत पड़ने पर हमले जारी रखने का फैसला
हिजबुल्लाह प्रतिरोध का अधिकार और हमलों के खिलाफ चेतावनी
पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की
Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.