Strait of Hormuz Update: ईरान ने कमर्शियल जहाजों को दी गुजरने की मंज़ूरी, भारत के करोड़ों परिवारों को मिलेगी LPG गैस
ईरान ने Strait of Hormuz (हर्मुज जलडमरूमध्य) से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों की आवाजाही में थोड़ी ढील दी है। पिछले कुछ हफ्तों से चल रहे भारी तनाव के बीच अब इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या दोगुनी हो गई है। 18 मार्च 2026 के ताजा शिप-ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार, ईरान अब सिर्फ दोस्त और तटस्थ देशों के जहाजों को ही सुरक्षित रास्ता दे रहा है। इस अहम फैसले से भारत को भी बड़ी राहत मिली है, क्योंकि देश में कुकिंग गैस की भारी किल्लत शुरू हो गई थी।
नए नियम क्या हैं और किन जहाजों को मिल रही है एंट्री?
ईरान के अधिकारियों ने जहाजों के गुजरने के लिए अब एक नया ‘परमिशन सिस्टम’ लागू कर दिया है। अब जो भी जहाज इस रास्ते से गुजरेगा, उसे अपनी पूरी पहचान और मंजिल की जानकारी देनी होगी।
इसके साथ ही जहाज कंपनियों को यह भी साबित करना होगा कि उनका अमेरिका या इजरायल से कोई लेना-देना नहीं है। इस बात की पुष्टि इराक में ईरान के राजदूत मोहम्मद काज़ेम अल-सादेघ ने भी की है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा है कि यह रास्ता अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए खुला है, लेकिन दुश्मन देशों के जहाजों को यहां से गुजरने की मनाही है। डर के कारण कई जहाज खुद को सुरक्षित रखने के लिए अपने ट्रैकिंग सिस्टम (AIS) में All Chinese Crew या China Owner का टैग लगा रहे हैं।
भारत के लोगों पर इसका क्या असर होगा?
Strait of Hormuz में ट्रैफिक कम होने से भारत के करीब 33 करोड़ घरों में खाना पकाने वाली LPG गैस की भारी कमी हो गई थी। इसका बड़ा कारण यह है कि भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत LPG गैस इसी रास्ते से मंगाता है।
हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने सफलतापूर्वक बातचीत करके अपने LPG जहाजों को गुजरने का रास्ता साफ करवा लिया है। इससे भारत में घरेलू गैस की किल्लत जल्द दूर होने की उम्मीद है।
इसके अलावा, तुर्की के जहाजों को भी ईरान के बंदरगाहों पर रुकने के बाद आगे जाने की परमिशन मिल गई है। हालांकि, सुरक्षा और वार रिस्क को देखते हुए Maersk और Hapag-Lloyd जैसी बड़ी शिपिंग कंपनियां अभी भी इस रूट का इस्तेमाल करने से बच रही हैं और लंबे रास्ते से सफर कर रही हैं।




