Iran Statement at UN: ईरान ने UN में साफ की अपनी बात, कहा- बहरीन के खिलाफ नहीं, अमेरिका और इजरायल के ठिकानों पर हैं हमारे हमले
संयुक्त राष्ट्र (UN) में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावनी ने साफ किया है कि उनके सैन्य अभियान पूरी तरह से रक्षात्मक हैं। उन्होंने UN महासचिव और सुरक्षा परिषद को एक आधिकारिक पत्र लिखकर बताया कि ईरान का मकसद किसी भी पड़ोसी देश, खासकर बहरीन की संप्रभुता को नुकसान पहुंचाना नहीं है। ईरान की तरफ से यह स्पष्ट किया गया है कि उनके निशाने पर सिर्फ वह सैन्य ठिकाने हैं, जहां से उनके खिलाफ हमलों की शुरुआत की गई है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए यह जानना अहम है कि इस तनाव के बीच ईरान ने अपनी स्थिति को आधिकारिक तौर पर दुनिया के सामने रखा है।
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ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में क्या कहा?
ईरान के दूत ने UN चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए इसे अपनी आत्मरक्षा का अधिकार बताया है। उन्होंने अपने बयान में कई अहम बातें सामने रखी हैं जो आम लोगों के लिए जानना जरूरी है।
- ईरान का कहना है कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल की तरफ से शुरू हुए बिना वजह के हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की जा रही है।
- उन्होंने बताया कि ईरान के हमले सिर्फ उन्हीं जगहों पर हो रहे हैं जहां से उनके खिलाफ साजिश रची गई, जिसमें मुख्य रूप से अमेरिकी सैन्य बेस शामिल हैं।
- ईरान ने अंतरराष्ट्रीय ‘नो हार्म’ (No Harm) सिद्धांत का जिक्र किया। इसका मतलब है कि किसी भी देश को अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी तीसरे देश पर हमले के लिए नहीं करने देना चाहिए।
- ईरान ने सुरक्षा परिषद से मांग की है कि जब तक हमलावर देश अपनी कार्रवाई नहीं रोकते, तब तक उनका रक्षात्मक अभियान जारी रहेगा।
बहरीन और GCC की इस पर क्या प्रतिक्रिया है?
बहरीन ने ईरान के इन दावों और स्पष्टीकरण को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। GCC (गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल) के प्रतिनिधि के रूप में बोलते हुए बहरीन ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
- बहरीन ने कहा है कि ईरान के यह हमले अंतरराष्ट्रीय कानूनों और UN चार्टर के नियमों का सीधा उल्लंघन हैं।
- हाल ही में हुई ड्रोन गतिविधियों से बहरीन के एक पानी साफ करने वाले प्लांट (Desalination plant) को नुकसान पहुंचा है।
- हालांकि गल्फ में काम कर रहे भारतीयों और अन्य प्रवासियों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अभी तक पानी की सप्लाई में कोई रुकावट नहीं आई है।
- दोनों देशों ने अपने-अपने दावे और शिकायतें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सामने आधिकारिक पत्रों के जरिए पेश कर दिए हैं।





