ईरान के विदेश मंत्री ने UN में अमेरिका-इजरायल पर लगाया ‘युद्ध अपराध’ का आरोप, स्कूल हमले में 160 से अधिक बच्चों की मौत
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में शुक्रवार, 27 मार्च, 2026 को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक आपातकालीन बैठक में हिस्सा लिया। इस बैठक का मुख्य विषय ईरान के एक गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले पर चर्चा करना था। अराघची ने कहा कि ईरान ने कभी युद्ध नहीं चाहा, लेकिन जब तक ज़रूरी होगा, वह अपनी रक्षा करेगा। उन्होंने इस हमले को ‘युद्ध अपराध’ बताया, जिसमें 160 से ज़्यादा बच्चों की जान चली गई।
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संयुक्त राष्ट्र में क्या चर्चा हुई?
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने 23 मार्च, 2026 को ईरान, चीन और क्यूबा के अनुरोध पर इस आपातकालीन बहस का आयोजन किया था। इसका केंद्रबिंदु ‘अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र संघर्षों में बच्चों और शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा’ था। बहस में ईरान के शिराज प्रांत के मिनाब में शजारेह तय्येबेह गर्ल्स स्कूल पर 28 फरवरी, 2026 को हुए हमले पर बात हुई, जिसमें 160 से अधिक बच्चों की मौत हुई थी।
अधिकारियों और विशेषज्ञों के बयान
- ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची: उन्होंने इस हमले को अमेरिका और इजरायल द्वारा किया गया एक “सोचा-समझा हमला” बताया। अराघची ने कहा कि यह एक “युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध” है, जिसकी कड़ी निंदा होनी चाहिए और दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि 160 से ज़्यादा बच्चे मारे गए थे, जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों में 175 से अधिक छात्रों और शिक्षकों के मरने की बात कही गई है।
- संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क: तुर्क ने इस बमबारी को “दिल दहला देने वाला” बताया और पीड़ितों के लिए “न्याय” की मांग की। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार लोगों को तुरंत, निष्पक्ष, पारदर्शी और पूरी तरह से जांच करनी चाहिए और जांच के नतीजों को सार्वजनिक करना चाहिए।
- अमेरिकी अधिकारी: अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की कि हमले की जांच चल रही है। शुरुआती अमेरिकी आकलन से पता चलता है कि अमेरिका “संभावित रूप से” जिम्मेदार हो सकता है, लेकिन उनका इरादा जानबूझकर स्कूल को निशाना बनाने का नहीं था। संभवतः पुराने डेटा के कारण गलती से स्कूल पर हमला हो गया।
हमले में मारे गए दो बच्चों की मां मोहद्देसेह फलाहत ने परिषद से अपील की कि इस त्रासदी को भूला न जाए।
हाल के घटनाक्रम
27 मार्च, 2026 को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में यह आपातकालीन बहस हुई। इस दौरान अब्बास अराघची और वोल्कर तुर्क के बयान भी सामने आए। दिन भर न्यूज़ आउटलेट्स ने इन सभी गतिविधियों को बड़े पैमाने पर कवर किया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने आम नागरिकों को अमेरिकी सेना के पास के इलाकों से दूर रहने की चेतावनी दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को जलडमरूमध्य होर्मुज को फिर से खोलने की समय सीमा 6 अप्रैल तक बढ़ा दी है, हालांकि ईरान ने सीधी बातचीत से इनकार किया है और दोनों देशों के बीच तनाव जारी है।




