अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता से दो हफ्ते का युद्ध विराम तय हुआ है. लेकिन हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही अब भी बहुत धीमी है. शुरुआती दो दिनों में केवल 12 जहाज ही इस रास्ते से गुजरे हैं, जो कि युद्ध से पहले के मुकाबले बहुत कम है. इस मंदी से दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है क्योंकि दुनिया का करीब 20% तेल इसी रास्ते से जाता है.

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ईरान ने जहाजों की आवाजाही पर क्या शर्तें लगाई हैं?

ईरान ने युद्ध विराम के लिए सहमति तो दी, लेकिन उसने कई पाबंदियां लगा दी हैं. एक उच्च स्तरीय स्रोत के मुताबिक, ईरान अब एक दिन में 15 से ज्यादा जहाजों को रास्ता नहीं देगा. साथ ही, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जहाजों को लारक आइलैंड के पास के पानी से जाने का निर्देश दिया है ताकि जहाज समुद्री बारूदी सुरंगों (mines) से बच सकें. अब जहाजों को गुजरने के लिए ईरानी सेना के साथ तालमेल करना होगा.

क्या तेल जहाजों पर नया टैक्स लगेगा और विवाद क्या है?

खबर है कि ईरान अब तेल टैंकरों से हर बैरल पर 1 डॉलर का शुल्क वसूलने की योजना बना रहा है. अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने इसे एक खतरनाक कदम बताया है. अमेरिका ने भी चेतावनी दी है कि यह टैक्स युद्ध विराम की शर्तों का उल्लंघन होगा. इसके अलावा, लेबनान में इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच जारी लड़ाई के कारण ईरान ने 9 अप्रैल को इस रास्ते को फिर से बंद करने की कोशिश की थी, जिसे अमेरिका और इसराइल ने युद्ध विराम का हिस्सा नहीं माना.

मुख्य घटनाक्रम की जानकारी

तारीख घटना
7 अप्रैल 2026 डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान की मदद से 2 हफ्ते के युद्ध विराम का ऐलान किया.
9 अप्रैल 2026 ईरान ने लेबनान विवाद के कारण जलमार्ग को फिर से बंद करने की कोशिश की.
10 अप्रैल 2026 सिर्फ 12 जहाजों के गुजरने की खबर आई और इस्लामाबाद में नई बातचीत शुरू हुई.
Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.