Iran US Conflict: ईरान का अमेरिका को खुला चैलेंज, हमलों से नहीं टूटेगा सिस्टम, खाड़ी में दागी मिसाइलें
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक ताजा इंटरव्यू में साफ कर दिया है कि अमेरिकी और इजरायली हमलों से ईरान का ढांचा नहीं टूटेगा. उन्होंने कहा कि ईरान का सिस्टम मजबूत है और यह किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं करता. इस बीच ईरान ने इजरायल और खाड़ी में मौजूद अमेरिकी बेस पर कई मिसाइलें दागी हैं.
🚨: इजराइल ने बेरूत के बीचो-बीच गिराई बड़ी बिल्डिंग, 6 की मौत और कई लोगों की मलबे में तलाश जारी।
ईरान में कैसे चल रहा है सिस्टम
अरागची ने बताया कि ईरान में नए लीडर का चुनाव एक खास असेंबली करती है. जब तक नया लीडर नहीं चुना जाता, तब तक देश का कामकाज एक ट्रांजिशनल काउंसिल संभाल रही है. इस काउंसिल में राष्ट्रपति, न्यायपालिका के प्रमुख और एक गार्जियन काउंसिल के जूरिस्ट शामिल होते हैं.
ईरान का मानना है कि किसी बड़े नेता के न रहने से पूरा राजनीतिक और सामाजिक सिस्टम बंद नहीं होता. हाल ही में ईरान ने अली लारीजानी और जनरल गुलाम रजा सुलेमानी की मौत की पुष्टि भी की है. इन बड़े अधिकारियों के अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही हैं.
खाड़ी के समुद्री रास्तों पर असर
इस तनाव का सीधा असर खाड़ी देशों और वहां रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है. अरागची ने चेतावनी दी है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के लिए नए नियम लागू करेगा. अब विरोधियों को इस रास्ते पर बेरोकटोक आने-जाने की छूट नहीं मिलेगी.
मिसाइल और ड्रोन हमलों के डर से कई देशों ने इस समुद्री रास्ते का इस्तेमाल करना बंद कर दिया है. इससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और व्यापार पर बुरा असर पड़ रहा है, जिसका सीधा प्रभाव खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है.
हमलों और मौतों का ताजा आंकड़ा
28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस तनाव में अब तक काफी नुकसान हुआ है. ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे इस युद्ध से जुड़े कुछ अहम आंकड़े नीचे दिए गए हैं:
- अब तक इस लड़ाई में करीब 1,300 लोगों की जान जा चुकी है.
- ईरान ने इजरायल और खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर खुर्रमशहर-4 और कद्र मिसाइलें दागी हैं.
- अमेरिका ईरान के मिसाइल ठिकानों पर 5,000 पाउंड के बड़े बम गिरा रहा है. एक बम की कीमत करीब 2 लाख 88 हजार डॉलर है.
- अमेरिका में भी इस युद्ध को लेकर मतभेद शुरू हो गए हैं. अमेरिका के नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के डायरेक्टर जो केंट ने युद्ध का समर्थन करने से मना करते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.




