ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को चिंता में डाल दिया है। अमेरिकी डेडलाइन और युद्ध की आहट की खबरों से ग्लोबल मार्केट में डर का माहौल बना हुआ है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और शेयर बाजार पर पड़ रहा है, जिससे आने वाले समय में आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है।

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कच्चे तेल और ग्लोबल मार्केट पर क्या हुआ असर

ईरान से जुड़े हालातों के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत 111 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है। पिछले कुछ दिनों से तेल की कीमतों में लगातार बढ़त देखी जा रही है। अमेरिकी शेयर बाजार के फ्यूचर्स में करीब 0.5% की गिरावट आई है। एशियाई बाजारों में भी शुरुआती बढ़त गायब हो गई और निवेशक अब जोखिम लेने से बच रहे हैं। ऐसे समय में अमेरिकी डॉलर काफी मजबूत बना हुआ है क्योंकि लोग इसे सुरक्षित निवेश मान रहे हैं।

विवाद और मुख्य घटनाक्रम की जानकारी

  • Strait of Hormuz: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए 48 घंटे की डेडलाइन दी है।
  • Oil Prices: तनाव के कारण तेल की कीमतें 105 डॉलर से बढ़कर अब 111 डॉलर के पार जा चुकी हैं।
  • Global Impact: संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट के अनुसार, इस संघर्ष से पूरे मिडिल ईस्ट की इकोनॉमी को भारी नुकसान हो सकता है।
  • Official Stance: ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि ज़मीनी हमला होने पर उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
  • Stock Market: अमेरिका और एशिया के बाज़ार तनाव की खबरों के बाद लगातार नीचे गिर रहे हैं।

आम आदमी और प्रवासियों पर क्या होगा प्रभाव

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर वहां रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों पर पड़ता है। तेल की कीमतें बढ़ने से खाड़ी देशों में महंगाई बढ़ सकती है। इसके अलावा शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव से निवेशकों का पैसा फंसने का डर रहता है। अगर ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध जैसे हालात बनते हैं, तो इसका असर उड़ानों के किराए और सामान की सप्लाई पर भी पड़ेगा, जिससे खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों का खर्च बढ़ सकता है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.