ईरान और अमेरिका की बातचीत फेल, इस्लामाबाद में नहीं बनी बात, अब ट्रंप ने दी नाकाबंदी की धमकी
पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच हुई करीब 21 घंटे की बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ ने कहा कि उन्होंने नेक नीयत से बातचीत की, लेकिन पुराने दो युद्धों के अनुभव के कारण उन्हें विरोधी पक्ष पर भरोसा नहीं था। इस विफलता के बाद अब दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
बातचीत क्यों नहीं हो पाई और क्या थे मुख्य विवाद?
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में कई गंभीर मुद्दों पर असहमति रही। अमेरिका चाहता था कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने का ठोस वादा करे, जबकि ईरान ने अपनी शर्तों पर जोर दिया। दोनों पक्षों के बीच मुख्य विवादों की जानकारी नीचे दी गई है:
- ईरान ने परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंध हटाने की मांग की थी।
- होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण को लेकर विवाद रहा।
- ईरान ने लेबनान में युद्धविराम और अपनी जमी हुई संपत्तियों की वापसी को जरूरी शर्त बताया था।
- अमेरिका ने ईरान के परमाणु हथियारों की होड़ को रोकने पर जोर दिया।
बातचीत टूटने के बाद अब क्या हालात हैं?
समझौता न होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की पूरी तरह से समुद्री नाकाबंदी (Naval Blockade) करने की धमकी दी है। वहीं अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में माइन क्लियरिंग ऑपरेशन शुरू कर दिया है, जिसे ईरान ने पूरी तरह गलत बताया है।
| पक्ष | प्रतिनिधि / मुख्य मुद्दा |
|---|---|
| ईरान | मोहम्मद बागर गालिबाफ (संसद स्पीकर) |
| अमेरिका | जेडी वेंस (उपराष्ट्रपति) |
| मध्यस्थ | पाकिस्तान (पीएम शहबाज शरीफ) |
| ईरान की मांग | 10 सूत्रीय शांति योजना |
| अमेरिका की मांग | 15 सूत्रीय प्रस्ताव |
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर कोई भी विदेशी सैन्य जहाज उनके जल क्षेत्र में घुसा तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा। इस बीच लेबनान में युद्धविराम को लेकर भी विवाद जारी है और ईरान ने अमेरिका और इसराइल पर इस ceasefire को तोड़ने का आरोप लगाया है।




