Strait of Hormuz में बढ़ सकता है तनाव, ईरान ने अमेरिका और इज़राइल पर लगाया बड़ा आरोप, पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में उछाल
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने साफ़ तौर पर कहा है कि Strait of Hormuz में जो असुरक्षा बनी हुई है, वह सीधे तौर पर अमेरिका और इज़राइल के अवैध हमलों का नतीजा है। ईरान का मानना है कि शिपिंग में होने वाली रुकावटों के लिए उसे ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए क्योंकि यह स्थिति दूसरे देशों द्वारा शुरू किए गए संघर्ष की वजह से पैदा हुई है। इस बढ़ते तनाव के कारण दुनिया भर में प्राकृतिक गैस और पेट्रोल की कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है।
ईरान की सेना और सरकार का इस मामले पर क्या स्टैंड है?
ईरान के विदेश मंत्रालय और वहां की सैन्य कमान Khatam Al-Anbiya ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा की मौजूदा स्थिति के लिए वे देश ज़िम्मेदार हैं जो इस क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं।
- ईरान के सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनके पावर प्लांट्स पर हमला हुआ, तो वे Strait of Hormuz को पूरी तरह बंद कर देंगे।
- विदेश मंत्री Araghchi के अनुसार, यह समुद्री रास्ता फिलहाल केवल अमेरिका और उसके करीबियों के लिए बंद माना जा रहा है।
- रूस ने भी बयान दिया है कि इस क्षेत्र में शांति तभी हो सकती है जब ईरान के खिलाफ चल रहे संघर्ष को रोका जाए।
- ईरान ने UN महासचिव को सूचित किया है कि Strait of Hormuz की समस्या को अमेरिका-इज़राइल युद्ध से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
खाड़ी देशों और वहां रहने वाले प्रवासियों पर इसका क्या असर होगा?
यह तनाव केवल राजनीतिक नहीं है बल्कि इसका सीधा असर खाड़ी देशों में रहने वाले आम लोगों और भारतीय प्रवासियों पर भी पड़ रहा है। सप्लाई चेन प्रभावित होने से रोज़मर्रा की चीज़ों के दाम बढ़ सकते हैं।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| कीमतों में वृद्धि | ग्लोबल मार्केट में तेल और गैस के दाम बढ़ने से खर्चों पर दबाव बढ़ गया है। |
| सुरक्षा चिंता | ईरान ने परोक्ष रूप से क्षेत्र के पावर प्लांट्स, जिनमें UAE का Barakah न्यूक्लियर प्लांट भी शामिल है, को लेकर चिंता जताई है। |
| ट्रम्प का अल्टीमेटम | अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को 48 घंटे के भीतर रास्ता पूरी तरह खोलने की चेतावनी दी थी। |
| बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर | ईरानी सेना ने उन देशों के पावर प्लांट्स को भी निशाना बनाने की बात कही है जहाँ अमेरिकी बेस मौजूद हैं। |
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह केवल पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों को ही अपना लक्ष्य बना रहा है। इस बीच, ब्रिटेन के विदेश सचिव के साथ हुई बातचीत में भी ईरान ने ज़ोर दिया कि भविष्य के हमलों को रोकने की गारंटी मिलने पर ही युद्ध समाप्त हो सकता है।





