ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची (Abbas Araghchi) ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह के समझौते या बातचीत की संभावनाओं को फिलहाल खारिज कर दिया है। उन्होंने अल जज़ीरा (Al Jazeera) से बातचीत में कहा कि ईरान को अमेरिका की नीयत में कोई ईमानदारी नज़र नहीं आती। इस समय दोनों देशों के बीच विश्वास का स्तर शून्य पर पहुँच गया है। इस बयान के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों पर पड़ने की आशंका है।

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ईरान ने बातचीत को लेकर क्या साफ़ किया है?

ईरान के विदेश मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं कर रहे हैं। उन्होंने पिछले खराब अनुभवों का हवाला देते हुए बताया कि अमेरिका अपनी बातों पर टिकने वाला देश नहीं है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (Masoud Pezeshkian) ने भी यह आरोप लगाया कि जब बातचीत की कोशिशें हो रही थीं, तब ईरान पर हमले किए गए। ईरान का मानना है कि अमेरिका कूटनीति में यकीन नहीं रखता है। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने दावा किया था कि बातचीत में बड़ी प्रगति हुई है, लेकिन ईरान ने इसे पूरी तरह नकार दिया है।

क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रवासियों पर इसका क्या असर होगा?

  • हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है।
  • ईरान ने चेतावनी दी है कि वे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी कंपनियों को निशाना बना सकते हैं।
  • कच्चे तेल की सप्लाई रुकने से खाड़ी देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं।
  • UAE और सऊदी अरब में रहने वाले भारतीयों के लिए विमानों के रूट और किरायों में बदलाव हो सकता है।
  • चीन और पाकिस्तान ने शांति बनाए रखने के लिए पांच सूत्रीय योजना पेश की है।
  • कतर ने भी ईरान की सैन्य कार्रवाइयों पर चिंता जताई है जिससे आपसी रिश्तों में कड़वाहट आई है।

ताज़ा हमलों और भविष्य की चेतावनी

31 मार्च 2026 को तेहरान के आसपास हवाई हमलों की खबरें मिली हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के गोला-बारूद के डिपो को निशाना बनाया है। वहीं दूसरी तरफ, ईरान ने इस्राइल पर दवा कंपनियों को बम से उड़ाने का आरोप लगाया है। ईरान के सशस्त्र बलों ने घोषणा की है कि वे इन हमलों का बदला ज़रूर लेंगे। तनाव की वजह से ग्लोबल मार्केट में तेल और गैस की कमी होने लगी है, जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है।