ईरान अमेरिका जंग से क्रूड ऑयल 30% हुआ महंगा, शेयर बाज़ार धड़ाम, कुवैत और UAE ने घटाया उत्पादन
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगभग 30 प्रतिशत का भारी उछाल आया है. इस तनाव के चलते सोमवार को एशियाई शेयर बाज़ारों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. क्रूड ऑयल का भाव 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर के पार चला गया है. इसका सीधा असर कुवैत, UAE और बहरीन जैसे खाड़ी देशों के तेल उत्पादन और एक्सपोर्ट पर भी पड़ रहा है.
कच्चे तेल और शेयर बाज़ार का ताज़ा हाल
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) और ब्रेंट क्रूड दोनों की कीमतों में 28 से 30 प्रतिशत की भारी तेज़ी आई है. इनका भाव 118 से 119 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है. तेल की कीमतों में आए इस अचानक उछाल से निवेशकों में काफी घबराहट है. सोमवार 9 मार्च को एशियाई शेयर बाज़ारों में भारी बिकवाली हुई जिसके आंकड़े इस प्रकार हैं:
| देश (शेयर इंडेक्स) | गिरावट |
|---|---|
| South Korea (Kospi) | 8% (ट्रेडिंग 20 मिनट रोकी गई) |
| Japan (Nikkei 225) | 7% |
| Taiwan (Taipei) | 5% |
| Australia (S&P/ASX 200) | 4% |
| Hong Kong (Hang Seng) | 3 से 3.5% |
खाड़ी देशों और सप्लाई पर क्या असर हुआ?
हर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल टैंकरों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है. दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले कुल तेल का 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों के डर से यह स्थिति पैदा हुई है.
- उत्पादन में कटौती: कुवैत, इराक और UAE ने आधिकारिक तौर पर तेल उत्पादन कम करना शुरू कर दिया है. एक्सपोर्ट रुकने से उनके स्टोरेज टैंक पूरी तरह भर गए हैं.
- बहरीन में हमला: बहरीन की कंपनी Bapco Energies ने ईरान के हमले के बाद फोर्स मेजर (force majeure) घोषित कर दिया है. इस हमले में उनके तेल परिसर को भारी नुकसान पहुंचा है.
- ईरान में नया नेतृत्व: ईरान ने मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना है. बाज़ार के जानकारों का मानना है कि इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ेगा.
महंगाई और आम आदमी की जेब पर प्रभाव
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की एमडी क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने चेतावनी दी है कि यह युद्ध दुनिया भर में नई महंगाई लाएगा. ऊर्जा की बढ़ती लागत से रोजमर्रा के सामान और शिपिंग का खर्च तेजी से बढ़ेगा. इस संकट से निपटने के लिए G7 देश अपने इमरजेंसी तेल भंडार जारी करने पर विचार कर रहे हैं.
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे मायुंग ने जनता को घबराहट से बचाने के लिए 30 साल में पहली बार फ्यूल की कीमतों पर लिमिट तय कर दी है. अमेरिका में भी महज एक हफ्ते के भीतर पेट्रोल की कीमतों में भारी इजाफा देखा गया है. जानकारों के अनुसार यह स्थिति ग्लोबल इकोनॉमी के लिए एक बड़े झटके की तरह है.





