अमेरिका और इसराइल के ईरान पर हमले के बाद पूरी दुनिया में तेल का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इसका सबसे बुरा असर Global South यानी विकासशील देशों पर पड़ा है। इन देशों के पास तेल का पर्याप्त स्टॉक नहीं है, जिससे वहां की अर्थव्यवस्था और आम जनता दोनों मुश्किल में हैं।

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गरीब देशों पर क्या असर हुआ और क्यों है ये संकट?

Al Jazeera English की रिपोर्ट के मुताबिक, विकासशील देश इस तेल संकट से निपटने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे। इन देशों पर पहले से ही भारी कर्ज है, जो 2024 में 8.9 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था। तेल की बढ़ती कीमतों ने इन देशों के व्यापार संतुलन को बिगाड़ दिया है और उनके घाटे को बढ़ा दिया है।

  • कर्ज का जाल: कई देश जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) की वजह से कर्ज के संकट में फंसे हुए हैं।
  • कोलंबा समिट: 21 अप्रैल 2026 को कोलंबिया के सांता मार्टा में 50 से ज्यादा देश इकट्ठा हुए और जीवाश्म ईंधन को धीरे-धीरे खत्म करने की मांग की।
  • मांग: कोलंबिया की पर्यावरण मंत्री Irene Vélez Torres ने कहा कि Global South के देशों को उस संकट की कीमत नहीं चुकानी चाहिए जो उन्होंने पैदा नहीं किया।

तेल की कीमतों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए?

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने दुनिया के बाजारों को स्थिर करने के लिए अब तक का सबसे बड़ा इमरजेंसी तेल स्टॉक रिलीज करने का फैसला किया। इसके तहत सदस्य देशों को कुल 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में उतारने का लक्ष्य दिया गया।

विवरण डेटा/जानकारी
Global South का कर्ज (2024) 8.9 ट्रिलियन डॉलर
तेल उत्पादन का नुकसान 50 बिलियन डॉलर
IEA का कुल लक्ष्य 400 मिलियन बैरल
US द्वारा रिलीज तेल 53.3 मिलियन और 10 मिलियन बैरल
South Korea द्वारा रिलीज तेल 22.46 मिलियन बैरल

युद्ध और अर्थव्यवस्था की ताज़ा स्थिति क्या है?

Saudi Aramco के CEO ने बताया कि वेस्ट एशिया के इस युद्ध ने दुनिया का सबसे बड़ा एनर्जी शॉक पैदा कर दिया है। 24 अप्रैल 2026 तक इस युद्ध की वजह से लगभग 50 बिलियन डॉलर का तेल उत्पादन खत्म हो गया। IMF ने वैश्विक विकास दर के अनुमान को घटा दिया है और महंगाई बढ़ने की चेतावनी दी है।

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 11 मई 2026 को कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम (ceasefire) अब बहुत कमजोर स्थिति में है। अमेरिका ने ईरान से जुड़े 12 लोगों और संस्थाओं पर प्रतिबंध भी लगाए हैं। दूसरी तरफ, ईरान के संसदीय प्रवक्ता Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि उनकी सेना किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Global South देश तेल संकट से क्यों ज्यादा प्रभावित हैं?

इन देशों के पास तेल का पर्याप्त रिजर्व नहीं है और ये पहले से ही 8.9 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज में डूबे हुए हैं, जिससे तेल की कीमतें बढ़ते ही उनकी अर्थव्यवस्था डगमगा जाती है।

IEA ने तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए क्या किया?

IEA ने अपने सदस्य देशों के साथ मिलकर 400 मिलियन बैरल इमरजेंसी ऑयल स्टॉक रिलीज करने की योजना बनाई, जिसमें अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने करोड़ों बैरल तेल बाजार में उतारा।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.