Iran-US War Update: कच्चे तेल के दाम 120 डॉलर के पार, भारत में बदला सिलेंडर बुकिंग का नियम
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे सैन्य टकराव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अमेरिकी हमलों को ऑपरेशन एपिक मिस्टेक करार देते हुए कहा कि तेहरान पूरी तरह तैयार है। पिछले 9 दिनों में कच्चे तेल की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं और ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू गया है। युद्ध के कारण आम आदमी की ज़रूरतों से जुड़ी वस्तुओं के दाम भी आसमान छू रहे हैं।
तेल की बढ़ती कीमतों और बाज़ार पर क्या असर पड़ा?
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। ईरान का दावा है कि अमेरिका जानबूझकर उसके तेल और परमाणु ठिकानों को निशाना बना रहा है ताकि महंगाई का दबाव बढ़ाया जा सके। इसका सीधा असर दुनिया भर के शेयर बाज़ारों पर भी दिखा है।
- ब्रेंट क्रूड की कीमत साल 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर को पार कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।
- अमेरिका का डाओ जोंस इंडेक्स 632 अंक और एसएंडपी 500 में 1.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
- भारत में कच्चे तेल की खरीद का औसत भाव 69.01 डॉलर से बढ़कर 80.16 डॉलर के पार चला गया है।
- भारत सरकार ने एलपीजी (LPG) सिलेंडर रिफिल कराने की न्यूनतम अवधि 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दी है ताकि कालाबाजारी रोकी जा सके।
खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और सुरक्षा की स्थिति
युद्ध की आंच अब खाड़ी देशों तक पहुंच गई है जिससे वहां रहने वाले भारतीय प्रवासियों की चिंता बढ़ गई है। यूएई (UAE) में स्थित बीएपीएस (BAPS) मंदिर को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। वहीं सऊदी अरब ने अपने तेल क्षेत्रों पर हुए ड्रोन हमलों के बाद सुरक्षा चेतावनी जारी की है। भारत सरकार ईरान में फंसे भारतीय छात्रों को सुरक्षित निकालने के लिए लगातार राजदूत के संपर्क में है।
| मुख्य घटना | ताज़ा जानकारी |
|---|---|
| ईरान के नए सुप्रीम लीडर | आयतुल्लाह मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति |
| मिसाइल गतिविधि | तुर्की के हवाई क्षेत्र में ईरानी मिसाइल इंटरसेप्ट की गई |
| टारगेट एरिया | इजरायल, तेल अवीव और यूएई की संपत्तियां |
| ट्रैवल एडवाइजरी | दक्षिण-पूर्वी तुर्की के लिए ‘यात्रा न करें’ के निर्देश |
सैन्य अभियान और नेतृत्व में बदलाव
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को ऑपरेशन एपिक फ्युरी नाम दिया है। दूसरी ओर ईरान ने आधिकारिक रूप से आयतुल्लाह मोजतबा खामेनेई को अपना नया सुप्रीम लीडर घोषित किया है। तुर्की और नाटो बलों ने 9 मार्च को ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने की पुष्टि की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि तेल की कीमतों में यह बढ़ोतरी एक छोटी कीमत है और ईरान के परमाणु खतरे के खत्म होते ही कीमतें गिरेंगी। डब्ल्यूएचओ (WHO) ने चेतावनी दी है कि तेल डिपो पर हमलों के कारण ईरान के कुछ हिस्सों में तेल मिश्रित बारिश हो रही है जो पर्यावरण के लिए खतरनाक है।




