ईरान ने अमेरिका को साफ शब्दों में बता दिया है कि वह अपने मिसाइल प्रोग्राम पर कोई समझौता नहीं करेगा। 11 फरवरी को ईरान में हुए एक बड़े कार्यक्रम के दौरान देश के बड़े अधिकारी Ali Shamkhani ने इसे ‘रेड लाइन’ घोषित किया है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए मिसाइल जरूरी है और इस पर किसी भी तरह की बातचीत नहीं होगी। उधर वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के बीच लंबी बैठक हुई है, जिसमें ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति तय की गई है।

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ईरान ने रखी अपनी शर्तें

ईरान और अमेरिका के बीच ओमान में बातचीत का पहला दौर 6 फरवरी को हुआ था। अब दूसरे दौर की तारीख तय करने के लिए चर्चा चल रही है। ईरान के अधिकारियों ने साफ किया है कि बातचीत सिर्फ ‘न्यूक्लियर’ मुद्दे पर होनी चाहिए। ईरान ने यह प्रस्ताव दिया है कि अगर उन पर लगी सारी आर्थिक पाबंदियां हटा ली जाएं, तो वे यूरेनियम एनरिचमेंट को 60% से घटाकर 20% कर देंगे।

हालांकि, ईरान का कहना है कि मिसाइल और डिफेंस सिस्टम उनकी सुरक्षा के लिए हैं और इसे राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। अली लारीजानी ने बताया कि ओमान में हुई पहली बैठक के नतीजे ठीक रहे हैं और अब आगे की बात करने के लिए तैयारी चल रही है।

अमेरिका और इजरायल का प्लान

व्हाइट हाउस में हुई तीन घंटे की बैठक में Donald Trump और Netanyahu ने ईरान के मुद्दे पर गहरी चर्चा की। अमेरिका चाहता है कि समझौते में सिर्फ न्यूक्लियर ही नहीं, बल्कि मिसाइल और प्रॉक्सी ग्रुप्स को भी शामिल किया जाए। ट्रम्प प्रशासन ने साफ कहा है कि बातचीत जारी रहनी चाहिए, लेकिन दबाव कम नहीं होगा।

  • ट्रम्प ने फारस की खाड़ी में एक ‘दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर’ भेजने की बात कही है।
  • अमेरिका इसे ‘मैक्सिमम प्रेशर’ यानी ज्यादा से ज्यादा दबाव बनाने का तरीका मान रहा है।
  • IAEA की रिपोर्ट के मुताबिक, अभी ईरान के पास करीब 9,870 किलोग्राम यूरेनियम का स्टॉक है।

अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर कूटनीति काम नहीं आई, तो जून 2025 जैसी सैन्य कार्रवाई भी एक विकल्प हो सकती है। दोनों देश फरवरी के अंत में दोबारा बातचीत की मेज पर आ सकते हैं।