ईरान युद्ध रोकने के लिए चीन और पाकिस्तान की बड़ी बैठक, अमेरिका के साथ बातचीत कराने की पेशकश
31 मार्च 2026 को पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar और चीनी विदेश मंत्री Wang Yi के बीच बीजिंग में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में ईरान में चल रहे युद्ध और इसके कारण दुनिया भर में हो रही तेल की कीमतों में बढ़ोतरी पर गहरी चिंता जताई गई। पाकिस्तान ने साफ तौर पर कहा है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत कराने और उसकी मेजबानी करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ℹ️: UAE ने मार गिराए ईरान से आए 12 मिसाइल और 36 ड्रोन, मलबे से दुबई में 4 लोग घायल।
शांति वार्ता को लेकर क्या हुई बड़ी बातें?
चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, चीन और पाकिस्तान ईरान की स्थिति पर आपसी तालमेल को और मजबूत करेंगे। इस कूटनीतिक पहल का मकसद क्षेत्र में शांति बहाल करना और तनाव को कम करना है। बैठक के कुछ अहम बिंदु इस प्रकार हैं:
- पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने की इच्छा जाहिर की है।
- चीन और पाकिस्तान का मानना है कि केवल बातचीत के जरिए ही इस युद्ध को खत्म किया जा सकता है।
- युद्ध की वजह से Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ा है, जिसे सामान्य करना जरूरी है।
- ग्लोबल मार्केट में तेल की बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए दोनों देशों ने एकजुट होकर काम करने पर सहमति जताई।
इस शांति पहल में शामिल मुख्य देश और पक्ष
इस बैठक से पहले पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्रियों के साथ भी सलाह-मशविरा किया था। चीन ने पाकिस्तान को अपना सबसे पुराना और भरोसेमंद साथी बताते हुए शांति के प्रयासों में पूरा सहयोग देने की बात कही है। नीचे दी गई टेबल में उन प्रमुख पक्षों की जानकारी है जो इस पूरी प्रक्रिया में शामिल हैं:
| देश/पक्ष | भूमिका और विवरण |
|---|---|
| चीन | Wang Yi और Mao Ning ने शांति वार्ता का समर्थन किया |
| पाकिस्तान | Ishaq Dar ने अमेरिका-ईरान वार्ता की मेजबानी की पेशकश की |
| अमेरिका और ईरान | युद्ध के मुख्य पक्ष जिन्हें बातचीत के लिए बुलाया जा रहा है |
| सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र | क्षेत्रीय शांति चर्चाओं में शामिल अन्य महत्वपूर्ण देश |
दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे तनाव कम करने में मदद करें। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने बताया कि ईरान और अमेरिका दोनों ने पाकिस्तान पर अपना भरोसा जताया है, जो भविष्य की शांति वार्ता के लिए एक सकारात्मक संकेत है।




