Iran War Update: ईरान के Bandar Abbas पोर्ट पर भारी हमला, Dubai Airport पर फ्लाइट्स रुकी और तेल के दाम 100 डॉलर पार
16 मार्च 2026 को ईरान के बंदर अब्बास (Bandar Abbas) पोर्ट पर भारी बमबारी की खबर आई है। यह हमला अमेरिका और इजरायल की ओर से चलाए जा रहे सैन्य अभियान के तहत किया गया है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती इस जंग की वजह से अब पड़ोसी देशों में भी तनाव का माहौल है। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए यूएई और सऊदी अरब की तरफ ड्रोन और मिसाइलें दागी हैं, जिसका सीधा असर आम जनजीवन और अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर पड़ा है।
UAE और सऊदी अरब पर हमले का क्या असर हुआ?
ईरान की ओर से किए गए जवाबी हमलों के बाद दुबई और रियाद जैसे शहरों में अलर्ट जारी किया गया है। खाड़ी में रहने वाले प्रवासियों और वहां की यात्रा करने वाले लोगों के लिए स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। मुख्य अपडेट इस प्रकार हैं:
- Dubai Airport: दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट को ईरानी ड्रोन गतिविधि के कारण 16 मार्च को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।
- Saudi Arabia: रियाद के ऊपर ईरानी ड्रोन देखे गए जिन्हें सऊदी डिफेंस ने हवा में ही नष्ट कर दिया।
- UAE: अबू धाबी और फुजैरा के कुछ इलाकों में मिसाइल हमलों की खबरें आई हैं।
- Indian Expats: खाड़ी में रहने वाले लाखों भारतीयों के लिए हवाई यात्रा और सुरक्षा को लेकर एडवाइजरी जारी होने की संभावना है।
तेल की कीमतों और समुद्री रास्ते पर ताजा स्थिति
ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट पर हुए हमले से समुद्री व्यापार ठप हो गया है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अमेरिका और इजरायल के सहयोगी देशों के जहाजों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया है। इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
| प्रमुख क्षेत्र | वर्तमान स्थिति |
|---|---|
| Bandar Abbas | 9th Air Base और 2nd Naval Base बुरी तरह क्षतिग्रस्त |
| Crude Oil | कीमतें $100 प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गईं |
| Strait of Hormuz | अमेरिका और सहयोगियों के लिए रास्ता बंद |
| Displacement | ईरान में लगभग 32 लाख लोग अपना घर छोड़ चुके हैं |
इजरायल के रक्षा मंत्री ने कहा है कि युद्ध निर्णायक चरण में पहुंच गया है, वहीं ईरान का विदेश मंत्रालय किसी भी तरह के युद्धविराम से इनकार कर रहा है। अमेरिका ने तेल के जहाजों की सुरक्षा के लिए ‘होर्मुज गठबंधन’ बनाने की अपील की है। आने वाले दिनों में यह तनाव और बढ़ सकता है जिससे खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।





