ईरान ने लेबनान के प्रधानमंत्री को कड़ी चेतावनी दी है। ईरान का कहना है कि अगर लेबनान की सरकार हिज़बुल्लाह की भूमिका को नज़रअंदाज़ करेगी, तो देश में सुरक्षा का खतरा बढ़ सकता है। यह मामला तब सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर इस्लामाबाद में बातचीत चल रही है।

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ईरान और लेबनान के बीच विवाद की मुख्य वजह क्या है?

ईरान का मानना है कि लेबनान की सुरक्षा के लिए हिज़बुल्लाह का होना ज़रूरी है। वहीं लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम का कहना है कि युद्ध रोकने के लिए बातचीत करने का अधिकार सिर्फ लेबनान की सरकार के पास है। उन्होंने लेबनान की सेना को आदेश दिया है कि वे बेरूत में सरकारी नियंत्रण बढ़ाएं और हथियारों पर सिर्फ सुरक्षा बलों का कब्ज़ा हो।

शांति वार्ता और अन्य देशों का क्या कहना है?

वर्तमान स्थिति को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका देखें:

देश/संगठन मुख्य स्टैंड/रुख
ईरान युद्धविराम समझौते में लेबनान को शामिल करने की ज़िद कर रहा है।
लेबनान किसी भी बाहरी संस्था को अपने नाम पर बातचीत करने का अधिकार नहीं देती।
हिज़बुल्लाह चेतावनी दी है कि अगर लेबनान को बाहर रखा गया तो समझौता टूट सकता है।
इसराइल लेबनान में सैन्य हमले जारी रखे हैं और कहा है कि समझौता वहां लागू नहीं होता।
अमेरिका ईरान के साथ इस्लामाबाद में शांति वार्ता कर रहा है।
पाकिस्तान इस पूरी बातचीत के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और मीटिंग की मेजबानी कर रहा है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा है कि अगर इसराइल लेबनान पर हमले जारी रखता है, तो बातचीत का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। ईरान ने साफ़ किया है कि वह लेबनान का साथ नहीं छोड़ेगा। दूसरी तरफ लेबनान की सरकार इसराइल के हमलों के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शिकायत करने की तैयारी कर रही है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.