अमेरिका और ईरान के बीच शांति बनाने के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद में बहुत अहम बातचीत शुरू हुई है. दोनों देशों के बीच पिछले कुछ दिनों से ceasefire लागू है, लेकिन इसराइल की हरकतों ने इस नाजुक शांति को खतरे में डाल दिया है. इस बातचीत का मकसद मिडिल ईस्ट में अमन लाना है, जिसमें अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति JD Vance अपनी टीम के साथ पहुंचे हैं.

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अमेरिका और ईरान की बातचीत में मुख्य मुद्दे क्या हैं?

दोनों देशों के बीच बातचीत तो चल रही है, लेकिन उनकी मांगें एक-दूसरे से काफी अलग हैं. अमेरिका जहां सुरक्षा और नियमों पर जोर दे रहा है, वहीं ईरान अपनी आर्थिक पाबंदियों को खत्म करवाना चाहता है. इस विवाद के मुख्य बिंदु नीचे दी गई टेबल में देखे जा सकते हैं:

पक्ष मुख्य मांगें और शर्तें
अमेरिका (USA) ईरान को यूरेनियम संवर्धन (uranium enrichment) बंद करना होगा और ग्लोबल एनर्जी वाटरवे को बिना किसी देरी के खोलना होगा.
ईरान (Iran) अमेरिका को ईरान पर लगी सभी पाबंदियां (sanctions) पूरी तरह हटानी होंगी और उनकी जमा संपत्ति वापस करनी होगी.
लेबनान मामला अमेरिका और इसराइल का कहना है कि लेबनान ceasefire का हिस्सा नहीं है, जबकि पाकिस्तान का मानना है कि इसे शामिल किया जाना चाहिए.

पूर्व डिप्लोमैट KP Fabian ने इस बैठक को लेकर क्या कहा?

पूर्व डिप्लोमैट KP Fabian ने इस पूरी स्थिति पर अपनी राय रखी है. उन्होंने कहा कि अमेरिका और इसराइल के रिश्तों की वजह से शांति की राह में बड़ी रुकावट आ रही है. Fabian ने एक मशहूर मुहावरे का इस्तेमाल करते हुए कहा कि इस गठबंधन में पूंछ कुत्ते को हिला रही है, जिसका मतलब है कि इसराइल अमेरिका के फैसलों को प्रभावित कर रहा है.

उन्होंने इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को एक ऐसी बड़ी समस्या बताया जिसे सब नजरअंदाज कर रहे हैं, क्योंकि नेतन्याहू इस बातचीत को सफल नहीं होने देना चाहते. Fabian का यह भी मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप पर नेतन्याहू का काफी असर है, लेकिन अब ट्रंप को इसके राजनीतिक नुकसान दिखने लगे हैं और वे जल्द ही अपना सख्त रुख अपना सकते हैं.

बातचीत की मौजूदा स्थिति और टीम की जानकारी

इस शांति वार्ता के लिए अमेरिका की तरफ से एक हाई-प्रोफाइल टीम पाकिस्तान पहुंची है. इस टीम का नेतृत्व उपराष्ट्रपति JD Vance कर रहे हैं, जिनके साथ ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही ट्वीट करके बताया था कि उन्होंने ईरान का प्रस्ताव देखा है और उस पर बातचीत की जा सकती है.

बता दें कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और इसराइल ने 40 दिनों तक ईरान पर सैन्य हमले किए थे. बुधवार से लागू हुए दो हफ्ते के ceasefire के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि इस्लामाबाद की ये बातचीत किसी ठोस नतीजे पर पहुंचेगी.