ईरान की चेतावनी, Strait of Hormuz में उकसावे वाली कार्रवाई से और बिगड़ेंगे हालात, भारत जैसे मित्र देशों के जहाजों को मिलेगी छूट
ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने Strait of Hormuz को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर इस समुद्री रास्ते में किसी भी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई की गई, तो क्षेत्र के हालात और भी ज्यादा खराब हो सकते हैं। 30 मार्च 2026 को जारी इस बयान में Araghchi ने साफ किया कि ईरान अपने खिलाफ होने वाले हमलों के जवाब में रक्षात्मक ऑपरेशन जारी रखेगा। इस तनाव का असर सीधा अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की सप्लाई पर पड़ता दिख रहा है, क्योंकि इस रास्ते से होने वाली जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है।
Strait of Hormuz में अभी क्या स्थिति है और किन देशों को मिली है राहत?
ईरान ने यह स्पष्ट किया है कि उसने Strait of Hormuz को पूरी तरह बंद नहीं किया है, बल्कि यह केवल दुश्मन देशों और उनसे जुड़े जहाजों के लिए बंद है। भारत जैसे देशों के लिए राहत की बात यह है कि ईरान ने मित्र देशों के जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने का वादा किया है। इस समुद्री रास्ते की ताजा स्थिति नीचे दी गई टेबल में समझी जा सकती है:
| विवरण | ताजा जानकारी |
|---|---|
| ट्रैफिक में कमी | मार्च की शुरुआत में जहाजों की आवाजाही 95% तक घटी |
| मित्र देश | भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान |
| हालिया ट्रांजिट | चीन के COSCO और Mac Hope जहाज को मिली अनुमति |
| अमेरिकी रुख | तेल कुओं और पावर प्लांट पर हमले की चेतावनी |
क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों और हमलों से जुड़ी मुख्य बातें
इस पूरे विवाद के बीच खाड़ी देशों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ईरान का कहना है कि जब तक व्यापार की आजादी नहीं मिलेगी, तब तक नेविगेशन की आजादी का सम्मान नहीं किया जाएगा। तनाव से जुड़ी कुछ अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं इस प्रकार हैं:
- कुवैत की सेना ने 30 मार्च को 13 ड्रोन का पता लगाया और उन्हें नष्ट किया, जिससे एक प्लांट को नुकसान पहुंचा है।
- तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने भी अपनी सीमा में घुस रही एक ईरानी मिसाइल को मार गिराने की बात कही है।
- Houthi विद्रोहियों ने भी इस संघर्ष में कूदते हुए समुद्री रास्तों पर जोखिम बढ़ा दिया है।
- अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को चेतावनी दी है कि वह जल्द से जल्द रास्ता खोले वरना परिणाम भुगतने होंगे।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर होने वाली चर्चा को भी ईरान ने उकसावे वाली कार्रवाई बताया है।
खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और विशेष रूप से भारतीय नागरिकों के लिए यह स्थिति काफी संवेदनशील है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और समुद्री रास्तों में रुकावट आने से भारत के साथ होने वाले व्यापार और उड़ानों पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल ईरान और अमेरिका के बीच चल रही यह जुबानी जंग अब धरातल पर सैन्य गतिविधियों में बदलती दिख रही है।




