Iran Warning to Gulf Countries: ईरान ने खाड़ी देशों को दी सीधी चेतावनी, कहा अमेरिकी सेना को बाहर निकालें
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा युद्ध अब तीसरे हफ्ते में पहुंच गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने खाड़ी देशों (GCC) को एक कड़ा अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा है कि जो देश अमेरिकी सेना को अपनी ज़मीन का इस्तेमाल करने दे रहे हैं, वे उन्हें तुरंत बाहर निकालें। ईरान का आरोप है कि अमेरिका उसके सहयोगी देशों की ज़मीन से उन पर लगातार हमले कर रहा है। इस भारी तनाव का सीधा असर मिडिल ईस्ट में रहने वाले प्रवासियों और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने लगा है।
ईरान ने क्यों दी खाड़ी देशों को चेतावनी?
ईरान का दावा है कि अमेरिका ने UAE के रास अल खैमाह और दुबई के पास के इलाकों से उनके खार्ग और अबू मूसा द्वीपों पर हमला किया है। हालांकि UAE के वरिष्ठ अधिकारी अनवर गर्गश ने इस दावे को पूरी तरह से गलत बताया है और कहा है कि उनके देश की ज़मीन का इस्तेमाल ऐसे किसी काम के लिए नहीं हुआ है। ईरान के विदेश मंत्री ने साफ़ कहा है कि जब तक अमेरिकी सेना इन देशों में रहेगी, तब तक यह हमले और असुरक्षा का कारण बनेगी। ईरान का कहना है कि वे केवल अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बना रहे हैं।
अमेरिकी कंपनियों और तेल के दामों पर क्या होगा असर?
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उनके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ, तो वे खाड़ी में मौजूद अमेरिकी कंपनियों के ऑफिस और सुविधाओं को निशाना बनाएंगे। इनमें Google, Microsoft, Amazon और IBM जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं, जहां हजारों लोग काम करते हैं। इस युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत 119.48 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। अधिकारियों का मानना है कि अगर यह युद्ध नहीं रुका तो तेल की कीमत 200 डॉलर तक जा सकती है जिससे भारत सहित पूरी दुनिया में महंगाई काफी बढ़ जाएगी।
अमेरिका पर ‘LUCAS’ ड्रोन इस्तेमाल करने का आरोप
ईरान ने यह भी दावा किया है कि अमेरिका एक नया ‘LUCAS’ ड्रोन इस्तेमाल कर रहा है जो दिखने में बिल्कुल ईरानी ‘Shahed-136’ ड्रोन जैसा है। ईरान के मुताबिक, अमेरिका इस ड्रोन का इस्तेमाल करके हमले कर रहा है ताकि सारा इल्ज़ाम ईरान पर लगाया जा सके। इस बीच कतर, सऊदी अरब और ओमान इस युद्ध को रोकने के लिए बीच-बचाव करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। ईरान ने Strait of Hormuz को आम जहाजों के लिए खुला रखा है, लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगियों के जहाजों की एंट्री पूरी तरह से बंद कर दी गई है।




