अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री तनाव के बीच एक बड़ी खबर आई है. अमेरिकी सेना ने जिस ईरानी जहाज़ को ज़ब्त किया था, उसके नाविक अब अपने वतन लौट आए हैं. इन नाविकों को पाकिस्तान की मदद से तेहरान पहुँचाया गया है, जिससे इस तनावपूर्ण माहौल में थोड़ी राहत मिली है.
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जहाज़ को क्यों पकड़ा गया और नाविक कैसे लौटे?
यह पूरा मामला M/V Touska नाम के एक ईरानी कंटेनर जहाज़ से जुड़ा है. अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने इस जहाज़ को 19 अप्रैल 2026 को ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) में ज़ब्त किया था. अमेरिका का कहना था कि इस जहाज़ ने नौसेना की नाकेबंदी के नियमों का उल्लंघन किया और 6 घंटे की चेतावनी के बाद भी उनकी बात नहीं मानी.
- जहाज़ पर कुल 22 नाविक सवार थे.
- इन सभी नाविकों को पहले पाकिस्तान भेजा गया.
- 4 मई 2026 को 15 नाविक सिस्तान-बलूचिस्तान के रिमदान बॉर्डर के रास्ते ईरान में दाखिल हुए.
- ईरान की सरकारी एजेंसी IRNA ने इस वापसी की पुष्टि की है.
इस मामले में पाकिस्तान की क्या भूमिका रही?
पाकिस्तान ने इस पूरे मामले में एक बिचौलिए की भूमिका निभाई. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि नाविकों को अपने देश के रास्ते ईरान भेजना एक कॉन्फिडेंस-बिल्डिंग मेज़र (भरोसा बढ़ाने वाला कदम) था. पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री इशाक डार ने इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि उनका देश क्षेत्रीय शांति और बातचीत के लिए प्रतिबद्ध है.
खबरों के मुताबिक, ज़ब्त किए गए जहाज़ M/V Touska को ज़रूरी मरम्मत के लिए पाकिस्तानी समुद्री इलाके में ले जाया जाएगा और उसके बाद इसे मालिकों को सौंप दिया जाएगा.
ईरान और अमेरिका के बीच क्या विवाद हुआ?
जहाज़ को ज़ब्त किए जाने के बाद ईरान काफी नाराज़ था. ईरान ने अमेरिका की इस कार्रवाई को समुद्री डकैती करार दिया और कहा कि यह अप्रैल महीने में हुए युद्धविराम (ceasefire) का खुला उल्लंघन है. वहीं अमेरिका का तर्क था कि जहाज़ उनकी चेतावनी को नज़रअंदाज़ कर रहा था, इसलिए उसे पकड़ना ज़रूरी था.
Frequently Asked Questions (FAQs)
M/V Touska जहाज़ को अमेरिका ने कब और कहाँ पकड़ा था?
अमेरिकी सेना ने 19 अप्रैल 2026 को ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) में M/V Touska जहाज़ को ज़ब्त किया था, क्योंकि उसने अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी का उल्लंघन किया था.
नाविकों की घर वापसी में पाकिस्तान ने क्या मदद की?
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने नाविकों को अपने इलाके से गुज़रने और ईरान भेजने की सुविधा दी. इसे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक शांति कदम बताया गया.
