इराक के विदेश मंत्री Fuad Hussein ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इलाके में चल रहे युद्ध की वजह से इराक और Gulf देशों के बीच के रिश्ते खराब हुए हैं। अब इराक सरकार इन रिश्तों को फिर से जोड़ने और सुधारने के लिए तुरंत कदम उठाएगी।

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इराक और Gulf देशों के रिश्तों में क्यों आई दूरी?

इराक के विदेश मंत्री Fuad Hussein ने 17 मई 2026 को बताया कि पिछले कुछ हफ्तों से क्षेत्र में चल रहे सैन्य संघर्ष के कारण संबंधों पर असर पड़ा है। उन्होंने साफ किया कि रिश्ते खराब जरूर हुए हैं लेकिन किसी भी समय पूरी तरह टूटे नहीं थे। अब इराक सरकार अपनी पुरानी समस्याओं को सुलझाकर क्षेत्रीय देशों के साथ दोबारा मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश करेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब 14 मई 2026 को इराक की संसद ने Zidi सरकार को भरोसा जताया और Fuad Hussein को दोबारा विदेश मंत्री बनाया।

सुरक्षा और तेल निर्यात को लेकर क्या है इराक का स्टैंड?

विदेश मंत्री ने पहले ही यह साफ कर दिया था कि इराक किसी भी ऐसे हमले का समर्थन नहीं करेगा जो Gulf देशों या Jordan को निशाना बनाए। उनके मुताबिक, पड़ोसी देशों की सुरक्षा इराक की अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है और क्षेत्र की शांति सबके हित में है। साथ ही, उन्होंने चिंता जताई थी कि Hormuz जलडमरूमध्य में सैन्य कार्रवाई की वजह से तेल निर्यात में दिक्कतें आ सकती हैं, इसलिए उन्होंने सभी हमलों को रोकने की मांग की थी।

रिश्तों को सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए?

इराक ने हाल ही में सऊदी अरब और ओमान के साथ बातचीत बढ़ाई है। 19 अप्रैल 2026 को सऊदी विदेश मंत्री से फोन पर चर्चा हुई थी, जिसमें आपसी मुद्दों पर बात की गई। वहीं 15 मई 2026 को ओमान के विदेश मंत्री ने Fuad Hussein को उनके नए कार्यकाल के लिए बधाई दी और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की। इराक ने यह भी भरोसा दिलाया है कि वह अपनी जमीन को क्षेत्रीय दुश्मनी निकालने का मैदान नहीं बनने देगा।

Frequently Asked Questions (FAQs)

इराक के विदेश मंत्री ने Gulf देशों के साथ रिश्तों के बारे में क्या कहा?

उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय युद्ध की वजह से रिश्ते खराब हुए हैं और अब सरकार इन्हें तुरंत सुधारने के लिए काम करेगी।

इराक की सुरक्षा और तेल निर्यात को लेकर क्या चिंता जताई गई है?

मंत्री ने कहा कि Hormuz जलडमरूमध्य में सैन्य हमलों से तेल निर्यात में मुश्किल आ सकती है और उन्होंने पड़ोसी देशों की सुरक्षा को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बताया।