ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 27 मार्च 2026 को ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 के 84वें चरण को अंजाम दिया है। इस सैन्य कार्रवाई में खाड़ी क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोनों से हमला किया गया। IRGC ने अपने सार्वजनिक जनसंपर्क कार्यालय के माध्यम से इस ऑपरेशन की घोषणा की और क्षेत्र में रह रहे लोगों के लिए सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं। यह कार्रवाई क्षेत्रीय सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल के जवाब में की गई है।
हमलों में किन जगहों को निशाना बनाया गया और क्या नुकसान हुआ?
IRGC की एरोस्पेस फोर्स और नौसेना ने मिलकर सऊदी अरब के अल-खर्ज (Al-Kharj) बेस को निशाना बनाया। इस ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल की गई मिसाइलों ने वहां मौजूद रसद सुविधाओं और अमेरिकी सेना के हवाई ईंधन भरने वाले विमानों को नुकसान पहुंचाया है। संगठन ने दावा किया है कि इस हमले में कई बड़े विमान पूरी तरह तबाह या क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
- सऊदी अरब के अल-खर्ज बेस पर मिसाइल और ड्रोन से हमला हुआ
- अमेरिकी सेना के रसद और सपोर्ट सिस्टम को निशाना बनाया गया
- Wave 83 के दौरान अल-धफरा और अली अल-सलेम जैसे बेस पर भी कार्रवाई की गई
- अशदोद तेल भंडारण टैंक और मोदीइन में सैन्य ठिकानों पर हमले की खबरें आई हैं
- इन हमलों में पिनपॉइंट मिसाइलों और विनाशकारी ड्रोनों का इस्तेमाल हुआ
प्रवासियों और आम जनता के लिए जारी की गई आधिकारिक गाइडलाइन
खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और स्थानीय निवासियों के लिए IRGC ने कुछ सख्त निर्देश जारी किए हैं। अमेरिकी सेना के ठिकानों के पास रहने वाले लोगों को वहां से तुरंत हटने के लिए कहा गया है। विशेष रूप से भारी उद्योगों और अमेरिकी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे औद्योगिक बुनियादी ढांचे पर होने वाले संभावित हमलों से बचने के लिए अपने कार्यस्थल छोड़ दें।
| क्षेत्र या वर्ग | जारी निर्देश |
|---|---|
| आम नागरिक | अमेरिकी बेस वाले इलाकों से तुरंत दूर रहें |
| कंपनी कर्मचारी | अमेरिकी सहयोगी कंपनियों के दफ्तरों को खाली करें |
| रहिवासी | इंडस्ट्रियल यूनिट्स के 1 किलोमीटर के दायरे से हट जाएं |
| शिपिंग सेक्टर | दुश्मन देशों के बंदरगाहों पर आवाजाही पर प्रतिबंध रहेगा |
IRGC ने स्पष्ट किया है कि उसकी सेना फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए आम लोगों को सलाह दी गई है कि वे सैन्य ठिकानों और संवेदनशील इलाकों से अपनी दूरी बनाए रखें ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। यह चेतावनी उन सभी क्षेत्रों के लिए है जहां विदेशी सेनाएं मौजूद हैं।
