Israel Iran War Update: इस्राइली सेना ने तेहरान में हथियार बनाने वाले ठिकानों को किया तबाह, ईरान के कई मिसाइल सेंटर बर्बाद
इस्राइली सेना ने 26 मार्च 2026 को ईरान के तेहरान और मध्य ईरान में मौजूद हथियार बनाने वाली जगहों पर बड़ा हमला किया है। सेना के प्रवक्ता ने बताया कि इस ऑपरेशन में 60 से ज्यादा लड़ाकू विमान शामिल थे जिन्होंने ईरान के सैन्य ठिकानों पर 150 से ज्यादा बम गिराए। इस हमले का मुख्य मकसद ईरान की मिसाइल बनाने की क्षमता को नुकसान पहुंचाना है। इस कार्रवाई के दौरान ईरानी नेवी के एक बड़े कमांडर की मौत की भी पुष्टि हुई है।
इस्राइली सेना ने किन जगहों को बनाया अपना निशाना?
सेना की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक हमलों में खास तौर पर Parchin इलाके में स्थित मिसाइल प्लांट को निशाना बनाया गया है। यहां पर उन मशीनों और ठिकानों को बर्बाद किया गया है जो मिसाइलों के इंजन और वारहेड बनाने के काम आती थीं। इस्राइली सेना ने उन फैक्ट्रियों को भी तबाह कर दिया है जहां ठोस ईंधन वाली बैलिस्टिक मिसाइलें तैयार की जाती थीं।
- तेहरान और मध्य ईरान में मिसाइल प्रोडक्शन के मुख्य ठिकाने
- Parchin में मिसाइल इंजन और वारहेड बनाने वाली फैक्ट्री
- बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम के लिए सुरक्षा कवच बनाने वाली यूनिट
- Isfahan में Quds Force से जुड़े सैन्य उत्पादन केंद्र
ईरानी कमांडर की मौत और युद्ध की वर्तमान स्थिति
इस हमले के बीच इस्राइली रक्षा मंत्री ने पुष्टि की है कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नौसेना के कमांडर Alireza Tangsiri इस हवाई हमले में मारे गए हैं। अमेरिकी सैन्य कमान ने भी इस खबर का समर्थन किया है। हमले के बाद ईरान ने भी इस्राइल के कई शहरों की तरफ मिसाइलें दागी हैं जिससे वहां सायरन बजने लगे और कुछ इलाकों में नुकसान की खबरें आई हैं।
| प्रमुख जानकारी | विवरण |
|---|---|
| हमले की तारीख | 26 मार्च 2026 |
| विमानों की संख्या | 60 से ज्यादा लड़ाकू विमान | 150 से ज्यादा युद्ध सामग्री |
| प्रभावित मुख्य इलाके | Tehran, Isfahan, Parchin |
| मारे गए अधिकारी | Alireza Tangsiri (नेवी कमांडर) |
क्षेत्रीय तनाव और अन्य देशों पर इसका असर
इस युद्ध का असर अब आसपास के देशों पर भी दिखने लगा है। पाकिस्तान के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की कोशिशें भी चल रही हैं ताकि तनाव को कम किया जा सके। इस बीच इस्राइली सेना ने साफ कर दिया है कि वे ईरान के मिलिट्री ढांचे को पूरी तरह खत्म करने तक अपनी कार्रवाई जारी रखेंगे। इस तनाव की वजह से मध्य पूर्व के कई देशों में अलर्ट जारी किया गया है और हवाई यातायात पर भी असर पड़ा है।




