इसराइल ने ईरान के सबसे बड़े पेट्रोकेमिकल प्लांट को बनाया निशाना, अरबों डॉलर के नुकसान का दावा, काम पूरी तरह ठप.
पश्चिम एशिया में चल रहे भीषण संघर्ष के बीच इसराइल ने सोमवार को ईरान पर बड़ा हमला किया है। इसराइली वायु सेना ने बुशहर प्रांत के असलुयेह (Asaluyeh) में स्थित ईरान के सबसे बड़े पेट्रोकेमिकल प्लांट को निशाना बनाया। इस हमले से पार्स स्पेशल इकोनॉमिक एनर्जी ज़ोन के कई हिस्सों को भारी नुकसान पहुँचा है। ईरानी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि हमले में जाम और दमावंद कॉम्प्लेक्स बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, हालांकि राहत की बात यह है कि किसी की मौत की खबर नहीं आई है।
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इस हमले से ईरान को कितना नुकसान हुआ है?
इसराइल के रक्षा मंत्री ने इस हमले को ईरान की अर्थव्यवस्था पर एक बड़ा प्रहार बताया है। उनके अनुसार, निशाना बनाए गए ये प्लांट ईरान के कुल पेट्रोकेमिकल निर्यात का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा संभालते थे। इससे होने वाले नुकसान की जानकारी इस प्रकार है:
- इस हमले से ईरान को अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है।
- बिजली, पानी और ऑक्सीजन की सप्लाई करने वाली मोबिन और दमावंद कंपनियों को भी निशाना बनाया गया है।
- इन कंपनियों के ठप होने से असलुयेह के सभी पेट्रोकेमिकल प्लांट की बिजली कट गई है और काम रुक गया है।
- इसराइली सेना का कहना है कि वे ईरान के राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे पर ऐसे हमले जारी रखेंगे।
ईरान सरकार का क्या कहना है और वहां क्या हालात हैं?
ईरान की नेशनल पेट्रोकेमिकल कंपनी ने बताया है कि हमले के तुरंत बाद इमरजेंसी टीमों को तैनात कर दिया गया है। बुशहर प्रांत के अधिकारियों ने बताया कि कई प्रोडक्शन यूनिट्स क्षतिग्रस्त हुई हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।
- ईरान ने इस हमले को अपराधी हमला बताया है और इसकी कड़ी निंदा की है।
- ईरानी विदेश मंत्रालय ने मांग की है कि इस थोपे गए युद्ध को अब खत्म किया जाना चाहिए।
- हमले के बाद इलाके में तेज धमाकों की आवाज़ सुनी गई, जिसके बाद तकनीकी टीमें नुकसान की जांच में जुट गई हैं।
- खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह तनाव चिंता का विषय है क्योंकि तेल और गैस सेक्टर पर हमलों का असर पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।




