गाजा में हालात और खराब हो गए हैं। अब वहां सिर्फ खाने-पीने और ईंधन की कमी नहीं है, बल्कि लैपटॉप, फोन और कंप्यूटर के पार्ट्स पर भी रोक लगा दी गई है। इस फैसले से लाखों फिलिस्तीनियों की पढ़ाई और नौकरी पर बुरा असर पड़ा है। उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई है।
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इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर रोक क्यों लगी है?
इसराइल ने “ड्यूल-यूज़” (dual-use) नाम की एक पॉलिसी लागू की है। इसके तहत उन चीजों को रोका जाता है जिनका इस्तेमाल नागरिक और सेना दोनों कर सकते हैं। इसमें लैपटॉप, इंटरनेट राउटर, प्रिंटर, सेलुलर फोन और उनके चार्जर जैसी चीजें शामिल हैं। Gisha नाम की संस्था के मुताबिक, यह नियम अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है और इससे बुनियादी सुविधाओं को भारी नुकसान हो रहा है।
गाजा के लोगों पर इसका क्या असर हुआ?
वहां के टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा खराब हो चुका है और आधा तो पूरी तरह तबाह हो गया है। नेटवर्क न होने और नए पार्ट्स न मिलने से संचार व्यवस्था ठप्प है। कैश की कमी को दूर करने के लिए “Cash Belzmanash” जैसा अभियान शुरू किया गया ताकि लोग इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट का इस्तेमाल कर सकें, लेकिन इसके लिए भी बिजली और इंटरनेट का होना जरूरी है।
मदद पहुंचाने के लिए क्या कोशिशें हो रही हैं?
दुनिया भर से इस नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिशें जारी हैं। 12 अप्रैल 2026 को बार्सिलोना से ‘ग्लोबल सुमूद फ्लोटिला’ (Global Sumud Flotilla) रवाना हुआ। इसमें करीब 30 नावें शामिल थीं जिनमें मेडिकल सामान और अन्य जरूरी मदद भेजी गई। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने भी यह बात कही है कि सहायता पहुंचाना राजनीतिक शर्तों पर निर्भर नहीं होना चाहिए।
