इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 3 अप्रैल 2026 को बड़ा दावा करते हुए कहा है कि अमेरिका और इसराइल के साझा हवाई हमलों ने ईरान के स्टील उद्योग को भारी चोट पहुंचाई है। नेतन्याहू के मुताबिक ईरान की स्टील उत्पादन क्षमता का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा अब बर्बाद हो चुका है। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के आर्थिक संसाधनों को खत्म करना और उनकी हथियार बनाने की क्षमता को तोड़ना है।

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ईरान के किन उद्योगों को बनाया गया निशाना?

इसराइल और अमेरिका की तरफ से किए गए इन हमलों में ईरान की सबसे बड़ी स्टील फैक्ट्रियों को निशाना बनाया गया है। नेतन्याहू ने वीडियो बयान में बताया कि यह ऑपरेशन राष्ट्रपति ट्रंप के साथ पूरे तालमेल के साथ चलाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की अहम बुनियादी सुविधाओं और सैन्य ठिकानों पर लगातार हमले जारी हैं।

  • Mobarakeh Steel Company: ईरान की यह बड़ी कंपनी हमलों के बाद पूरी तरह बंद हो गई है।
  • Khuzestan Steel Company: इस कंपनी ने खुद पुष्टि की है कि अमेरिकी-इसराइली हमले के कारण उनके यहां काम रुक गया है।
  • परमाणु और बिजली केंद्र: स्टील प्लांट के साथ-साथ कुछ बिजली घरों और परमाणु केंद्रों को भी निशाना बनाने की खबर है।
  • सैन्य ठिकाने: इसराइली वायु सेना ने पिछले 24 घंटों में 170 से ज्यादा जगहों पर बमबारी की है।

ईरान की जवाबी कार्रवाई और खाड़ी देशों पर असर

ईरान ने भी इन हमलों के जवाब में बड़ी कार्रवाई करने का दावा किया है। ईरान के अधिकारियों के अनुसार उन्होंने अबू धाबी और बहरीन में मौजूद अमेरिकी और इसराइली उद्योगों को निशाना बनाया है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और विशेष रूप से भारतीय कामगारों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है क्योंकि औद्योगिक क्षेत्रों में तनाव बढ़ने से सुरक्षा और रोजगार पर सीधा असर पड़ सकता है।

दिनांक महत्वपूर्ण घटना
3 अप्रैल 2026 नेतन्याहू ने 70% स्टील उत्पादन तबाह होने का दावा किया
2 अप्रैल 2026 ईरान ने अबू धाबी और बहरीन में उद्योगों पर हमले किए
31 मार्च 2026 डोनाल्ड ट्रंप ने 13,000 लक्ष्यों पर हमले की बात कही
28 मार्च 2026 ईरान की दो बड़ी स्टील फैक्ट्रियों में काम बंद हुआ