Israel New Law: इजराइल के नए फांसी कानून पर भड़का सऊदी अरब, कई मुस्लिम देशों ने एक साथ दी चेतावनी
सऊदी अरब समेत कई खाड़ी और इस्लामिक देशों ने इजराइल द्वारा फिलीस्तीनियों के लिए लाए गए नए फांसी कानून की कड़ी निंदा की है। गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को सऊदी अरब, मिस्र, जॉर्डन, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, तुर्की, कतर और यूएई के विदेश मंत्रियों ने एक साझा बयान जारी किया। इस बयान में कहा गया कि इजराइल की संसद द्वारा पास किया गया यह कानून भेदभावपूर्ण है और इससे क्षेत्र में तनाव और ज्यादा बढ़ सकता है। इजराइली संसद ने इस कानून को 30 मार्च को मंजूरी दी थी, जिसके बाद से ही पूरे अरब जगत में इसका विरोध हो रहा है।
इजराइल के इस नए कानून में क्या प्रावधान दिए गए हैं?
इजराइल की संसद ने जो नया नियम बनाया है, वह मुख्य रूप से वेस्ट बैंक के फिलीस्तीनियों पर लागू होगा। इस कानून के तहत सजा और कोर्ट की प्रक्रिया में बड़े बदलाव किए गए हैं। इसकी मुख्य जानकारी नीचे दी गई टेबल में देख सकते हैं:
| नियम | विवरण |
|---|---|
| सजा का तरीका | दोषी पाए जाने पर फांसी से लटकाया जाएगा |
| अदालत का फैसला | अब जजों के साधारण बहुमत से सजा दी जा सकेगी |
| सजा की अवधि | सजा सुनाने के 90 से 180 दिनों के अंदर फांसी देनी होगी |
| अपील का हक | फिलीस्तीनियों के लिए अपील या माफी का कोई रास्ता नहीं होगा |
| भेदभाव का आरोप | यह कानून इजराइली नागरिकों पर लागू नहीं होगा |
सऊदी अरब और अन्य देशों ने विरोध में क्या दलील दी है?
सऊदी अरब और अन्य मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों ने कहा कि यह कानून मानवाधिकारों का बड़ा उल्लंघन है। उनका मानना है कि यह फिलीस्तीनियों के अस्तित्व को नकारने की एक कोशिश है। फिलीस्तीनी सरकार ने इसे एक युद्ध अपराध बताया है और कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है। फिलीस्तीन के लोगों ने इस कानून के विरोध में 1 अप्रैल को हड़ताल भी की थी।
- सऊदी अरब ने इसे रंगभेद की नीति को बढ़ावा देने वाला कदम बताया है।
- ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों ने भी इस कानून पर गहरी चिंता जताई है।
- इजराइल के सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर ने इस कानून का समर्थन करते हुए इसे सही ठहराया है।
- अमेरिका ने इस पर कहा कि यह इजराइल का अपना संप्रभु अधिकार है कि वह अपने कानून खुद बनाए।
मानवाधिकार संगठनों जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल और बी’त्सेलम ने भी इस फैसले को फिलीस्तीनियों के साथ अमानवीय व्यवहार बताया है। यह नया कानून अगले 30 दिनों में लागू होने की संभावना है, बशर्ते इसे किसी कानूनी चुनौती का सामना न करना पड़े।




