इज़राइल ने फिलिस्तीनी कैदियों के लिए फांसी की सज़ा का एक नया कानून पास किया है। इस कानून को रोकने के लिए अरब संसद के स्पीकर मोहम्मद अल-यमाही ने दुनिया भर में एक बड़ी मुहिम शुरू की है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रॉस जैसे बड़े संगठनों से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने को कहा है।

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इज़राइल के इस नए फांसी कानून में क्या है

यह कानून केवल फिलिस्तीनियों पर लागू होता है और आतंकवाद से जुड़े मामलों में फांसी की सज़ा देता है। कोर्ट के अंतिम फैसले के 90 दिनों के भीतर फांसी दी जाएगी। इसमें कैदियों को वकील और परिवार से मिलने की सुविधा बहुत कम दी गई है। यह कानून सैन्य अदालतों को फांसी देने का पूरा अधिकार देता है और एक बार फैसला आने के बाद सज़ा को कम नहीं किया जा सकता।

कौन-कौन से देश और संगठन इसका विरोध कर रहे हैं

इस कानून को सऊदी अरब, यूएई, कतर, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और तुर्की ने गलत बताया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इसे क्रूर और भेदभावपूर्ण कहा है। यूरोपीय संघ ने भी इज़राइल से मानवाधिकारों का पालन करने को कहा है। अरब संसद के स्पीकर ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद मांगी है।

विवरण जानकारी
कानून पास होने की तारीख़ 30 मार्च 2026
वोटिंग का नतीजा़ 62 के मुकाबले 48 वोट
प्रभावित लोग फिलिस्तीनी कैदी
जेल में बच्चे 350 बच्चे
मुख्य मांग कानून को तुरंत रद्द करना
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.