इजरायल और ईरान के बीच तनाव अब युद्ध का रूप ले चुका है। 28 मार्च 2026 को इजरायल ने आधिकारिक तौर पर बताया कि उसके 50 लड़ाकू विमानों ने ईरान के परमाणु ठिकानों और सैन्य उत्पादन केंद्रों को निशाना बनाया है। इस हमले में बुशहर परमाणु प्लांट और अराक के भारी जल संयंत्र सहित कई महत्वपूर्ण जगहों पर मिसाइलें दागी गई हैं। मिडिल ईस्ट में जारी इस जंग का असर अब पड़ोसी देशों पर भी दिखने लगा है जिससे वहां रहने वाले प्रवासियों में डर का माहौल है।

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इजरायल ने ईरान में किन जगहों को बनाया निशाना?

इजरायली सेना (IDF) के अनुसार यह हमला पूरी तरह से सुनियोजित था और इसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को चोट पहुँचाना था। इजरायल ने उन ठिकानों को चुना है जो हथियारों के निर्माण और यूरेनियम संवर्धन से जुड़े हुए थे।

  • Bushehr Nuclear Plant: यहाँ शुक्रवार 27 मार्च को मिसाइल से हमला किया गया।
  • Arak Heavy Water Complex: अराक में स्थित इस भारी जल संयंत्र को भी निशाना बनाया गया है।
  • Yazd Facility: यूरेनियम से जुड़े विस्फोटक तैयार करने वाली इस जगह पर बमबारी की गई।
  • Weapons Factories: सेना के मुताबिक ईरान के रक्षा मंत्रालय से जुड़े हथियारों के कारखानों को भी नष्ट किया गया है।

इजरायल का दावा है कि ये सभी ठिकाने हमास और हिजबुल्लाह जैसे समूहों को हथियारों की सप्लाई करने में मदद करते थे। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को इन हमलों की जानकारी दे दी गई है और फिलहाल किसी भी बाहरी रेडिएशन का खतरा नहीं बताया गया है।

ईरान की प्रतिक्रिया और वर्तमान स्थिति क्या है?

ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने हमलों की पुष्टि की है लेकिन कहा है कि इससे उनके काम में कोई बड़ी बाधा नहीं आई है। हालांकि ईरान के विदेश मंत्री और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने सख्त चेतावनी दी है कि इजरायल को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी और जवाबी हमला किया जाएगा।

प्रभावित क्षेत्र प्रमुख जानकारी
Tel Aviv ईरानी मिसाइल हमले में तेल अवीव में एक व्यक्ति की जान चली गई है।
Saudi Arabia सऊदी में एक बेस पर ईरानी हमले से अमेरिकी विमानों को नुकसान पहुंचा और सैनिक घायल हुए।
Yemen Houthis यमन के हुती विद्रोहियों ने पहली बार इजरायल पर मिसाइल दागने का दावा किया है।
Joint Operation यह कार्रवाई अमेरिका और इजरायल के साझा मिशन ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का हिस्सा है।

इस युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी और अब यह लगातार गंभीर होता जा रहा है। खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए सुरक्षा की स्थिति काफी अहम बनी हुई है क्योंकि दोनों देशों के बीच मिसाइल हमले अब आम होते जा रहे हैं।