Israel Iran War Update: इजरायल और ईरान के बीच युद्ध की सुगबुगाहट, सऊदी और यूएई ने हमला करने के लिए रास्ता देने से किया मना
मिडल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर है और इजरायल व ईरान के बीच सीधी सैन्य जंग की संभावना जताई जा रही है। अमेरिकी सूत्रों के अनुसार अगले कुछ दिनों में बड़ी सैन्य कार्रवाई हो सकती है क्योंकि कूटनीतिक बातचीत में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है। इस स्थिति को देखते हुए सऊदी अरब और यूएई ने अपनी हवाई सीमाओं को हमले के लिए इस्तेमाल करने से साफ मना कर दिया है। खाड़ी में रहने वाले प्रवासी भारतीयों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे तेल की कीमतें और हवाई यात्रा सीधे तौर पर प्रभावित होगी।
युद्ध होने पर तेल की कीमतों और बाजार पर कितना असर पड़ेगा?
अगर दोनों देशों के बीच जंग शुरू होती है तो कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा 65-69 डॉलर से उछलकर 108 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में किए जा रहे युद्धाभ्यास से तेल की सप्लाई पर बुरा असर पड़ सकता है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि इससे महंगाई और यात्रा खर्च में बढ़ोतरी देखी जा सकती है। निवेश के नजरिए से देखें तो लोग अब सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने की तरफ रुख कर रहे हैं।
सऊदी अरब और अमेरिका का इस मामले पर ताजा स्टैंड क्या है?
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने इस हफ्ते एक बड़ी नीतिगत घोषणा की है कि वे अपनी जमीन या सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी भी हमले के लिए नहीं करने देंगे। अमेरिका ने क्षेत्र में अपने दो प्रमुख विमानवाहक युद्धपोत तैनात कर दिए हैं ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान फिलहाल मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं ताकि सैन्य टकराव को टाला जा सके। इजरायल के भीतर भी होम फ्रंट कमांड ने नागरिकों को सतर्क रहने और शेल्टरों की जानकारी रखने की सलाह दी है।
| मुख्य बिंदु | रिपोर्ट के अनुसार डेटा |
|---|---|
| युद्ध की संभावना | 90 प्रतिशत (अगले कुछ हफ्ते) |
| कच्चे तेल की संभावित कीमत | 108 डॉलर प्रति बैरल |
| निर्णायक समय सीमा | अगले 72 घंटे से 2 हफ्ते |
| सऊदी और यूएई का रुख | तटस्थ (हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल पर रोक) |





