Israel Iran War Update: इजरायल और अमेरिका के हमले से रुका ईरान का न्यूक्लियर प्रोजेक्ट, नेतन्याहू का बड़ा ऐलान
इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान चलाया है जिसे Operation Epic Fury नाम दिया गया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने जानकारी दी है कि इस हमले के कारण ईरान अपने न्यूक्लियर और बैलिस्टिक प्रोजेक्ट को जमीन के नीचे सुरक्षित नहीं कर पाया। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस युद्ध ने मिडिल ईस्ट के हालात पूरी तरह से बदल दिए हैं और दोनों देशों की सेनाएं लगातार ईरानी ठिकानों को निशाना बना रही हैं।
📰: Saudi Border Update: सऊदी से खाड़ी देशों को जोड़ने वाले रास्तों की लिस्ट जारी, बहरीन कॉजवे हुआ बंद।
ईरान के ठिकानों पर क्या असर पड़ा है?
इजरायली सेना और अमेरिकी सेना लगातार ईरान के अहम ठिकानों पर बमबारी कर रही है। हाल ही में तेहरान के पास तालेघान न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर पर बड़ा हमला किया गया। इस हमले में ईरान के कई अहम प्रोजेक्ट तबाह हो गए हैं। नेतन्याहू ने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ईरान ऊंचे पहाड़ों के नीचे अपने हथियार छिपाने की कोशिश कर रहा था जिसे अब पूरी तरह रोक दिया गया है।
युद्ध से जुड़े मुख्य आंकड़े और नुकसान
इस युद्ध का असर पूरे मिडिल ईस्ट पर पड़ रहा है। नीचे अब तक हुए नुकसान की अहम जानकारी दी गई है:
- अब तक इजरायल और अमेरिका ने ईरान के 6000 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया है।
- अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार ईरान के 90 से ज्यादा समुद्री जहाज नष्ट हो चुके हैं जिनमें 30 माइन-लेइंग शिप भी शामिल हैं।
- यूएई और बहरीन ने अमेरिकी बेस की तरफ आ रहे कई ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को रास्ते में ही रोक दिया है।
- ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा।
आगे क्या कदम उठाए जाएंगे?
इजरायल के रक्षा मंत्री इसरायल काट्ज ने साफ कर दिया है कि इस सैन्य अभियान की कोई समय सीमा तय नहीं है। जब तक सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते तब तक हमले जारी रहेंगे। वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को रोकना सबसे जरूरी काम है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और वित्तीय संस्थाओं पर भी इस तनाव का असर दिख रहा है और सुरक्षा कारणों से कई बड़े बैंकों ने कॉन्फ्लिक्ट जोन में अपने ब्रांच बंद करने का फैसला लिया है।




