इसराइल की संसद Knesset ने एक नया कानून पास किया है जिसके तहत अब एक स्पेशल कोर्ट बनाया जाएगा. यह कोर्ट उन फिलिस्तीनियों को मौत की सजा सुना सकता है जिनका संबंध 7 अक्टूबर के हमलों से था. इस फैसले को 11 मई 2026 को मंजूरी दी गई और इसके बाद दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों ने इस पर चिंता जताई है.

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स्पेशल कोर्ट के नियम और सजा की प्रक्रिया क्या है?

इस नए कानून के तहत बनाए गए स्पेशल मिलिट्री ट्रिब्यूनल में मुकदमों की सुनवाई खुलेआम होगी और इन्हें Jerusalem के कोर्ट रूम से लाइव स्ट्रीम किया जाएगा. इस कोर्ट के काम करने के तरीके इस प्रकार हैं:

  • कोर्ट में तीन जज होंगे और मौत की सजा देने के लिए सभी जजों की सहमति जरूरी नहीं होगी, बहुमत से फैसला लिया जा सकेगा.
  • इस कोर्ट में सबूत जुटाने और गवाहों के बयान लेने के सामान्य नियमों को हटाया जा सकता है.
  • अगर किसी को मौत की सजा मिलती है और वह फैसला फाइनल हो जाता है, तो 90 दिनों के भीतर फांसी देना जरूरी होगा.
  • जिन लोगों को इस कानून के तहत सजा मिलेगी, उन्हें भविष्य में किसी भी कैदी अदला-बदली (prisoner exchange) के सौदे में रिहा नहीं किया जाएगा.

इसराइली सरकार और मानवाधिकार संगठनों का क्या कहना है?

इस कानून पर सरकार और राइट्स ग्रुप्स के बीच अलग-अलग राय है. इसराइल के न्याय मंत्री Yariv Levin ने इस फैसले को बहुत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इससे आतंकवादियों को कड़ी सजा मिलेगी. फाइनेंस मिनिस्टर Bezalel Smotrich ने कहा कि जिन्होंने कत्लेआम किया है उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी और यह न्याय है.

दूसरी तरफ, Adalah और Human Rights Watch जैसे संगठनों ने इसका विरोध किया है. उनका कहना है कि यह कानून निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को खत्म करता है. इन संगठनों ने चेतावनी दी है कि बिना सही कानूनी प्रक्रिया के मौत की सजा देना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और इसे एक युद्ध अपराध (war crime) माना जा सकता है. संगठनों का यह भी कहना है कि सैन्य अदालतों में अक्सर दबाव में लिए गए बयानों के आधार पर सजा सुनाई जाती है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

इसराइल की स्पेशल कोर्ट का नया कानून कब पास हुआ?

यह बिल 11 मई 2026 को इसराइल की संसद Knesset में पास हुआ, जिसमें 93 सदस्यों ने इसके पक्ष में वोट दिया.

सजा मिलने के बाद फांसी कब दी जाएगी?

कानून के मुताबिक, एक बार मौत की सजा फाइनल हो जाने के बाद, दोषी को 90 दिनों के भीतर फांसी की सजा दी जाएगी.

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.