इसराइल और लेबनान के बीच चल रही जंग में एक बड़ा मोड़ आया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच 10 दिनों के युद्धविराम का ऐलान किया है। इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे एक ऐतिहासिक शांति समझौते के मौके के तौर पर देखा है। अब पूरी दुनिया की नज़रें इस बात पर हैं कि क्या यह युद्धविराम स्थायी शांति में बदल पाएगा।

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युद्धविराम और शांति समझौते की क्या शर्तें हैं?

अमेरिका के दखल के बाद यह युद्धविराम 16 अप्रैल 2026 से लागू हुआ है। इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू का कहना है कि वे लेबनान के साथ एक ऐतिहासिक शांति समझौता करना चाहते हैं। हालांकि, इसराइल की मुख्य शर्त यह है कि लेबनान में हिज़्बुल्लाह को पूरी तरह निशस्त्र किया जाए। साथ ही, इसराइल अपनी उत्तरी बस्तियों की सुरक्षा की गारंटी चाहता है ताकि नागरिक सुरक्षित रह सकें। इस पूरी प्रक्रिया में संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 1701 को मुख्य आधार बनाया गया है।

लेबनान और अमेरिका का इस पर क्या रुख है?

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने युद्धविराम लागू होने से पहले नेतन्याहू से सीधे बात करने से इनकार कर दिया। लेबनानी अधिकारियों का मानना है कि ऐसी बातचीत नेतन्याहू के लिए एक नैतिक जीत जैसी होगी। वहीं, लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने इस युद्धविराम का स्वागत किया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्वास जताया है कि दोनों देशों के बीच शांति जल्दी आ सकती है। उन्होंने दोनों नेताओं को व्हाइट हाउस आने का न्योता भी दिया है ताकि सीधी बातचीत शुरू हो सके।

प्रमुख घटनाक्रम और तारीखें

तारीख महत्वपूर्ण घटना
9 अप्रैल 2026 नेतन्याहू ने लेबनान सरकार से संपर्क शुरू करने का निर्देश दिया
14 अप्रैल 2026 वाशिंगटन में इसराइल और लेबनान के बीच पहली सीधी बातचीत हुई
16 अप्रैल 2026 राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 दिन के युद्धविराम का ऐलान किया
16 अप्रैल 2026 राष्ट्रपति जोसेफ औन ने नेतन्याहू से सीधी बातचीत करने से मना किया
16 अप्रैल 2026 प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने युद्धविराम पर अपनी सहमति दी
लक्ष्य हिज़्बुल्लाह का निशस्त्रीकरण और स्थायी शांति समझौता
Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.