Israel Lebanon Talks: वॉशिंगटन में इसराइल और लेबनान के बीच 40 साल बाद हुई सीधी बात, अमेरिका ने कराया मिलाप
वॉशिंगटन डीसी में 14 अप्रैल 2026 को इसराइल और लेबनान के बीच दशकों बाद पहली बार सीधी राजनयिक बातचीत हुई। अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने इस बैठक की मध्यस्थता की ताकि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष को खत्म किया जा सके। हालांकि इस बैठक को शांति की दिशा में एक कदम माना गया, लेकिन जमीनी स्तर पर तनाव अब भी बरकरार है।
बातचीत में कौन शामिल था और क्या रही मुख्य बातें?
इस ऐतिहासिक बैठक में इसराइल की तरफ से राजदूत Yechiel Leiter और लेबनान की तरफ से राजदूत Nada Hamadeh Moawad ने हिस्सा लिया। अमेरिका ने इस पूरी प्रक्रिया में बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की। विदेश मंत्री Marco Rubio ने इसे शांति के लिए एक बड़ा मौका बताया और साफ किया कि यह केवल युद्धविराम नहीं बल्कि Hezbollah के प्रभाव को खत्म करने की एक प्रक्रिया है।
लेबनान और इसराइल की अलग-अलग मांगें क्या हैं?
- लेबनान का पक्ष: राष्ट्रपति Joseph Aoun ने उम्मीद जताई कि इस बातचीत से लोगों का दुख कम होगा, लेकिन उन्होंने इसराइल की वापसी और सीमा पर लेबनानी सेना की तैनाती को जरूरी बताया।
- इसराइल का पक्ष: प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि उनकी प्राथमिकता Hezbollah का निःशस्त्रीकरण और शांतिपूर्ण संबंध बनाना है।
- Hezbollah की प्रतिक्रिया: Hezbollah के महासचिव Naim Kassem ने इन बातचीत को बेकार बताया और कहा कि वे किसी भी ऐसे समझौते को नहीं मानेंगे।
जमीनी हालात और अब तक हुए नुकसान का ब्यौरा
डिप्लोमेटिक लेवल पर बातचीत तो हुई, लेकिन सीमा पर हमले बंद नहीं हुए। 2 मार्च 2026 से शुरू हुए इस संघर्ष में भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। बातचीत के आसपास के 24 घंटों में भी लेबनान में 35 लोगों की मौत हुई।
| विवरण | हताहतों की संख्या |
|---|---|
| लेबनान में कुल मौतें (मार्च से अब तक) | 2,000 से ज्यादा |
| लेबनान में पिछले 24 घंटों में मौतें | 35 लोग |
| इसराइल में कुल मौतें | 12 सैनिक और 2 नागरिक |




