इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने लेबनान के साथ एक ऐसी शांति समझौते की बात कही है जो कई पीढ़ियों तक चले। उन्होंने साफ़ किया है कि वह शांति चाहते हैं, लेकिन इसके लिए सुरक्षा की गारंटी मिलना ज़रूरी है। लेबनान ने पिछले एक महीने में कई बार इसराइल से सीधे बातचीत करने की कोशिश की है। अब अगले हफ्ते वाशिंगटन में दोनों देशों के बीच अहम बातचीत होने वाली है।

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शांति समझौते के लिए इसराइल की क्या शर्तें हैं?

प्रधानमंत्री Netanyahu ने बातचीत के लिए दो मुख्य शर्तें रखी हैं। पहली शर्त यह है कि Hezbollah के सभी हथियारों को खत्म करना होगा और वह पूरी तरह निशस्त्र होगा। दूसरी शर्त एक ऐसा स्थायी शांति समझौता करना है जिससे भविष्य में युद्ध की स्थिति न बने। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान और उसके समर्थकों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी क्योंकि सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है।

अगले हफ्ते वाशिंगटन में क्या होगा और अब तक क्या हुआ?

लेबनान की प्रेसिडेंसी ने ऐलान किया है कि अगले हफ्ते वाशिंगटन में एक मीटिंग होगी जहाँ युद्धविराम और शांति वार्ता की शुरुआत पर चर्चा होगी। लेबनान के प्रधानमंत्री Nawaf Salam ने बेरूत में केवल सरकारी संस्थानों को ही हथियार रखने की अनुमति दी है, जिसे इसराइल ने एक सकारात्मक कदम माना है। हालांकि, इसराइल की सेना ने पिछले 24 घंटों में Hezbollah के 200 से ज़्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं और नेतन्याहू ने कहा कि जब तक उत्तर इसराइल में सुरक्षा नहीं लौटती, हमले जारी रहेंगे।

अमेरिका और अन्य देशों की इसमें क्या भूमिका है?

इस पूरे विवाद को सुलझाने में अमेरिका बीच-बचाव कर रहा है और वाशिंगटन में होने वाली मीटिंग की मेजबानी भी अमेरिका ही करेगा। इस प्रक्रिया में JD Vance, Steve Witkoff और Jared Kushner जैसे बड़े अधिकारी शामिल हैं। वहीं, 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बीच भी बातचीत हुई, जिसमें लेबनान और इसराइल के बीच चल रहे संघर्ष को रोकने पर चर्चा की गई।