वेस्ट बैंक के जालुद गांव में इजरायली बसने वालों का हमला, ईद पर घरों और गाड़ियों को फूंका
वेस्ट बैंक के जालुद गांव में ईद अल-फितर के मौके पर इजरायली बसने वालों (settlers) ने जमकर उत्पाद मचाया है। दर्जनों की संख्या में आए हमलावरों ने गांव में घुसकर घरों को आग लगा दी और गाड़ियों को निशाना बनाया। इस हमले में कम से कम एक व्यक्ति के घायल होने की खबर है, जबकि गांव के कई हिस्सों में भारी नुकसान हुआ है। अक्टूबर 2023 से अब तक वेस्ट बैंक में हिंसा के चलते 1,000 से ज्यादा फलस्तीनी अपनी जान गंवा चुके हैं, जिससे इलाके में तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है।
जालुद गांव में हुए हमले में क्या-क्या नुकसान हुआ?
शनिवार और रविवार की रात को हुए इस हमले ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। हमलावरों ने न केवल घरों को नुकसान पहुंचाया बल्कि कई अन्य संपत्तियों को भी आग के हवाले कर दिया।
- हमलावरों ने गांव की काउंसिल बिल्डिंग और कम से कम चार गाड़ियों में आग लगा दी।
- तीन फलस्तीनियों के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा।
- गांव की दीवारों पर ‘बदला’ जैसे शब्द लिखे पाए गए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि यह हमला सोची-समझी साजिश थी।
- घटना के दौरान लोगों पर पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया गया और घरों पर पत्थरबाजी की गई।
- इजरायली सेना ने आगजनी की बात स्वीकार की है लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
इस घटना पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या प्रतिक्रिया आई?
इस हमले के बाद फलस्तीनी प्रशासन और अन्य देशों ने कड़ा रुख अपनाया है। मिस्र के विदेश मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है और चेतावनी दी है कि ऐसी घटनाएं स्थिति को और बिगाड़ सकती हैं। UNRWA के अधिकारियों ने कहा कि पवित्र महीने और ईद के दौरान इस तरह की हिंसा से फलस्तीनी समुदायों का विस्थापन तेज हो गया है। इसके अलावा कनाडा और 13 यूरोपीय देशों के राजनयिकों ने भी इस हिंसा की निंदा की है और इसे जमीन कब्जाने की कोशिश करार दिया है। इजरायल के भीतर भी कुछ नेताओं ने सरकार पर कानून व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम होने का आरोप लगाया है।




