इटली ने Strait of Hormuz में समुद्र से माइन्स हटाने के लिए अपने जहाज भेजने की तैयारी कर ली है. इटली के नौसेना प्रमुख ने इसकी पुष्टि की है कि वे एहतियात के तौर पर यह कदम उठा रहे हैं. इस मिशन का मुख्य मकसद समुद्री रास्तों को सुरक्षित बनाना है ताकि व्यापारिक जहाजों को किसी तरह का खतरा न हो.
इटली की क्या है योजना और कितने जहाज भेजेंगे
इटली की नौसेना इस मिशन के लिए कुल चार जहाज तैनात कर सकती है. इनमें दो माइन्सवीपर शामिल होंगे, जिनका काम समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों यानी माइन्स को ढूंढकर उन्हें हटाना होता है. इनके साथ एक एस्कॉर्ट जहाज और एक लॉजिस्टिक जहाज भी भेजा जाएगा. ये जहाज ला स्पेज़िया के उत्तर-पश्चिमी बंदरगाह से रवाना होंगे और गंतव्य तक पहुंचने में करीब चार हफ्ते का समय लेंगे.
कौन-कौन से देश होंगे इस मिशन का हिस्सा
इटली इस ऑपरेशन को अकेले नहीं करेगा, बल्कि वह एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का हिस्सा बनकर काम करेगा. यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, बेल्जियम और नीदरलैंड जैसे देशों के पास भी माइन्स हटाने की क्षमता है और वे इस मिशन में योगदान दे सकते हैं. इसी सिलसिले में पेरिस और लंदन में 30 से अधिक देशों के सैन्य अधिकारियों की बैठक भी हुई है ताकि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोलने की सैन्य योजना पर विचार किया जा सके.
हॉर्मुज स्ट्रेट में तनाव की मुख्य वजह क्या है
हॉर्मुज स्ट्रेट में फिलहाल काफी संघर्षपूर्ण स्थिति बनी हुई है. युद्धविराम के बावजूद हाल के दिनों में व्यापारी जहाजों पर हमले हुए हैं. ईरान ने इस रास्ते पर अपने संप्रभु नियंत्रण का प्रस्ताव रखा है और कहा है कि जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाता, तब तक रास्ता पूरी तरह बंद रहेगा. वहीं अमेरिकी सेना ने माइन्स हटाने के लिए समुद्र में रोबोट और ड्रोन तैनात कर रखे हैं.
