खाड़ी देशों के तेल और गैस प्लांट पर हमले की बड़ी चेतावनी, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव ने बढ़ाई सबकी टेंशन
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बादल और गहरे होते जा रहे हैं क्योंकि ईरान के करीबी गुट Kataib Hezbollah ने अब खुले तौर पर तेल और गैस के ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है। गुट के नेता Abu Hussein al-Hamidawi ने यह चेतावनी तब दी है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को Strait of Hormuz खोलने के लिए मंगलवार तक का समय दिया है। अगर हालात बिगड़ते हैं तो इसका सीधा असर खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों प्रवासियों और वहां की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
ℹ️: चीन और रूस ने ईरान युद्ध को लेकर की बड़ी बैठक, अमेरिका और इसराइल से जंग रोकने की अपील।
अमेरिका और ईरान के बीच क्यों बढ़ा विवाद?
विवाद की मुख्य वजह Strait of Hormuz का बंद होना है, जिसे ईरान ने अपनी शर्तों पर ही खोलने की बात कही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कहा है कि अगर मंगलवार 7 अप्रैल तक रास्ता नहीं खुला तो वह ईरान के बुनियादी ढांचे पर बड़ा हमला करेंगे। जवाब में ईरान के सहयोगियों ने क्षेत्र के तेल और गैस सप्लाई को ठप्प करने की धमकी दी है। इसके अलावा ईरान ने यह भी साफ़ कर दिया है कि वह अमेरिका और इसराइल के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति नहीं देगा और यह रास्ता पहले जैसा कभी नहीं होगा।
वर्तमान स्थिति और प्रमुख घटनाक्रम
| घटना | विवरण |
|---|---|
| ट्रंप का अल्टीमेटम | 7 अप्रैल तक Strait of Hormuz खोलने की आखिरी तारीख तय की गई है। |
| कुवैत पर हमला | 5 अप्रैल को कुवैत के ऊर्जा और सरकारी ठिकानों पर ईरानी ड्रोन हमले हुए थे। |
| ईरान की शर्त | युद्ध के नुकसान की भरपाई के बाद ही समुद्री रास्ता बहाल करने की बात कही गई। |
| नया खतरा | Bab al-Mandeb जैसे अन्य समुद्री रास्तों पर भी हमले की आशंका जताई गई है। |
ईरानी संसद के अध्यक्ष Mohammad Baqer Qalibaf ने अमेरिका को आगाह किया है कि यह खतरनाक खेल पूरे क्षेत्र को आग में झोंक सकता है। वहीं ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने ट्रंप की धमकियों को युद्ध अपराध करने के इरादे का सबूत बताया है। खाड़ी देशों में काम कर रहे प्रवासियों और विशेषकर भारतीयों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि तेल और गैस ठिकानों पर हमले से पूरे क्षेत्र की स्थिरता और रोजगार पर बुरा असर पड़ सकता है।




