कुवैत ने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और सैन्य हितों की रक्षा के लिए 16 मार्च 2026 को आतंकवाद के खिलाफ एक नया और बेहद सख्त कानूनी ढांचा लागू किया है। इसके तहत डिक्री लॉ नंबर 47 (आतंकवाद से निपटना) और डिक्री लॉ नंबर 13 (सैन्य प्राधिकरणों की सुरक्षा) को तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है। नए कानून में आतंकवादी गतिविधियों की परिभाषा को बड़ा कर दिया गया है और इसमें फांसी और उम्रकैद जैसी सख्त सजा का प्रावधान है।

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नए कानून में क्या-क्या बदलाव हुए हैं

इस नए कानून में आतंकवाद की परिभाषा को काफी व्यापक बनाया गया है। अब न केवल जान-माल का नुकसान बल्कि यातायात (भूमि, समुद्र, वायु) और साइबर सुरक्षा को नुकसान पहुंचाना भी इसमें शामिल है।

  • देश के बाहर लागू: अगर कोई देश के बाहर से भी कुवैत के नागरिकों, दूतावासों या विमानों को निशाना बनाता है, तो उस पर भी यह कानून लागू होगा।
  • समय सीमा खत्म: आतंकवादी अपराधों के लिए अब कोई समय सीमा (Statute of Limitations) नहीं है, यानी मुकदमा कभी भी चलाया जा सकता है।
  • प्रयास भी अपराध: किसी घटना को अंजाम देने की कोशिश करने वालों को भी वही सजा मिलेगी जो अपराध पूरा होने पर मिलती है।

सजा और रोकथाम के कड़े नियम

कुवैत सरकार ने इस नए कानून में सजा को और भी ज्यादा सख्त कर दिया है, ताकि देश के अंदर और बाहर किसी भी तरह की धमकी से निपटा जा सके।

  • फांसी की सजा: अगर किसी घटना में किसी की जान जाती है या राज्य की संप्रभुता को निशाना बनाया जाता है, तो फांसी की सजा अनिवार्य है।
  • उम्रकैद: किसी आतंकी संगठन से जुड़ने या हमले में किसी को घायल करने पर उम्रकैद मिलेगी।
  • निगरानी और जांच: कोर्ट अब अपराध होने से पहले ही किसी संदिग्ध व्यक्ति पर निगरानी, बातचीत पर रोक और सुधार कार्यक्रम जैसे आदेश दे सकता है।
  • राहत का नियम: अगर कोई व्यक्ति अपराध होने से पहले पुलिस या अथॉरिटी को जानकारी देता है, तो उसे सजा में छूट या राहत मिल सकती है।

कानून लागू होते ही 16 लोगों की गिरफ्तारी

नया कानून लागू होने के 24 घंटे के भीतर ही कुवैत के गृह मंत्रालय ने एक बड़ी कार्रवाई की है। अथॉरिटी ने हिजबुल्लाह से जुड़े 16 लोगों (14 कुवैती और 2 लेबनानी नागरिक) के एक आतंकी ग्रुप को गिरफ्तार किया है।

इनके पास से भारी मात्रा में हथियार, ड्रोन, मैप और संचार उपकरण बरामद किए गए हैं। पब्लिक प्रॉसिक्यूशन के फहद अल-मुताइरी ने जानकारी दी कि ये नए नियम अंतरराष्ट्रीय और संगठित खतरों से निपटने के लिए बेहद जरूरी थे।