कुवैत ने कुर्दिस्तान नेताओं पर हुए ड्रोन हमलों की निंदा की, खाड़ी देशों ने क्षेत्र में शांति के लिए उठाई आवाज़
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र के राष्ट्रपति नेचिरवन बरज़ानी और कुर्दिस्तान डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता मसूद बरज़ानी के घरों को निशाना बनाकर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की है। 29 मार्च 2026 को जारी एक बयान में कुवैत ने इन हमलों को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है और कई अंतरराष्ट्रीय शक्तियों ने इस पर अपनी चिंता जाहिर की है।
हमले में क्या हुआ और किन नेताओं को निशाना बनाया गया?
शनिवार, 28 मार्च 2026 को दुहुक में राष्ट्रपति नेचिरवन बरज़ानी के घर पर ड्रोन से हमला हुआ था। इसके बाद रविवार सुबह मसूद बरज़ानी के इरबिल स्थित आवास के पास भी एक सुरक्षा बलों ने ड्रोन को मार गिराया। इन हमलों में किसी के हताहत होने की खबर नहीं मिली है, लेकिन संपत्तियों को मामूली नुकसान पहुंचा है। कुवैत के साथ-साथ संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और सीरिया ने भी इन हमलों को सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताते हुए इनकी आलोचना की है।
कुवैत और अन्य देशों का इस पर क्या रुख है?
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कुवैत न्यूज़ एजेंसी के जरिए अपनी आधिकारिक निंदा दर्ज कराई है। इसके अलावा दुनिया के अन्य देशों और संस्थाओं ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है जो इस प्रकार है:
- संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हमले की तुरंत और व्यापक जांच की मांग की है।
- अमेरिका ने इन हमलों के पीछे ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों का हाथ होने की बात कही है।
- कुवैत के अपने हवाई अड्डे और रडार सिस्टम को भी हाल के दिनों में ड्रोन हमलों से नुकसान पहुंचा है।
- सऊदी अरब और यूएई ने इराक की एकता और सुरक्षा के प्रति अपना पूरा समर्थन दोहराया है।
- फ्रांस ने इन हमलों को अस्वीकार्य बताया और इसे इराकी संस्थानों पर बड़ा हमला कहा है।
आम लोगों और प्रवासियों पर इसका क्या असर होगा?
खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और विशेष रूप से भारतीयों के लिए यह स्थिति काफी महत्वपूर्ण है। पिछले 24 घंटों के दौरान कुवैत, कतर और बहरीन ने भी अपने हवाई क्षेत्र में कई मिसाइलों और ड्रोन को रोकने की जानकारी साझा की है। कुवैत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचने से यात्रियों की उड़ानों पर असर पड़ा है। सुरक्षा कारणों से खाड़ी के कई देशों में निगरानी को कड़ा कर दिया गया है। वहां रह रहे प्रवासियों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय खबरों और आधिकारिक सूचनाओं पर नज़र बनाए रखें क्योंकि हवाई यातायात और सुरक्षा नियमों में कभी भी बदलाव हो सकते हैं।




