कुवैत सरकार ने शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जालसाजी को लेकर बेहद सख्त कदम उठाए हैं। 12 फरवरी 2026 को जारी आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, अब फर्जी डिग्री का उपयोग करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान शामिल है। यह नियम सरकारी और प्राइवेट दोनों सेक्टर के कर्मचारियों पर लागू होगा, ताकि नौकरी के अवसरों में पूरी पारदर्शिता बनी रहे।

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क्या है सजा और जुर्माने का नियम

कुवैत पीनल कोड के आर्टिकल 259 के तहत फर्जी सर्टिफिकेट का इस्तेमाल करना एक आपराधिक अपराध माना गया है। जांच में दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को पांच साल तक की जेल की सजा हो सकती है। इसके अलावा 5,000 कुवैती दीनार (लगभग 16,250 अमेरिकी डॉलर) तक का जुर्माना भरने का आदेश दिया जा सकता है।

यह नियम उन सभी लोगों पर लागू होगा जो जानबूझकर जाली शैक्षणिक या प्रोफेशनल सर्टिफिकेट का उपयोग पब्लिक या प्राइवेट सेक्टर में नौकरी पाने के लिए करते हैं। विशेष रूप से सरकारी कर्मचारियों के लिए सजा और भी सख्त हो सकती है। उन्हें नौकरी से बर्खास्त करने के साथ-साथ, फर्जी डिग्री के आधार पर अब तक लिए गए वेतन और अन्य वित्तीय लाभों को भी वापस करने का आदेश दिया जा सकता है।

जांच और डेटा अपडेट की प्रक्रिया

Academic Credentials Verification Committee ने सभी सरकारी विभागों और प्राइवेट कंपनियों को तुरंत अपने कर्मचारियों का डेटा अपडेट करने का निर्देश दिया है। यह काम Sahel App के माध्यम से किया जा रहा है। Civil Service Commission (CSC) ने 11 और 12 फरवरी 2026 को सरकारी संस्थाओं के साथ बैठक कर नियमों को स्पष्ट किया है।

अधिकारियों ने साफ किया है कि विदेश से प्राप्त डिग्री की मान्यता (Equivalency) अब केवल Ministry of Higher Education की वेबसाइट या Sahel App के जरिए ही होगी। सरकार ने इस जांच का दायरा बढ़ा दिया है और अब प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की भी डिग्री की गहनता से जांच की जा रही है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.