कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ क्षेत्रीय घटनाक्रम पर चर्चा की है. इस बातचीत में कुवैत और अन्य खाड़ी देशों पर ईरानी हमलों को लेकर गहरी चिंता जताई गई है. 1 अप्रैल को कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक ड्रोन हमला हुआ था जिससे वहां के फ्यूल टैंक में आग लग गई थी. अब दोनों देश मिलकर अपनी सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठा रहे हैं. कुवैत ने इस हमले को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है.

कुवैत और खाड़ी देशों पर हो रहे हमलों का क्या है पूरा मामला?

कुवैत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ हफ्तों से लगातार इस सुरक्षा मुद्दे पर बातचीत हो रही है. दोनों देशों के अधिकारियों ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है. कुवैत के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि उनके पास आत्मरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का पूरा अधिकार है. खाड़ी देशों के अन्य विदेश मंत्रियों ने भी एक संयुक्त बयान जारी कर ईरान समर्थित गुटों के हमलों का विरोध किया है. कुवैत इस समय इन हमलों से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है.

सुरक्षा को लेकर किए गए मुख्य अपडेट और वर्तमान स्थिति

तारीख मुख्य घटना
1 अप्रैल 2026 कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला हुआ और फ्यूल टैंक में आग लगी.
2 अप्रैल 2026 अमेरिकी राष्ट्रपति ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ पर संबोधन दिया.
25 मार्च 2026 GCC देशों ने आत्मरक्षा के अधिकार पर संयुक्त बयान जारी किया.
28 फरवरी 2026 कुवैत ने अपनी जमीन पर हुए ईरानी हमले की कड़ी निंदा की थी.

यात्रियों और प्रवासियों पर इसका क्या असर पड़ेगा?

कुवैत और अन्य खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए सुरक्षा अब एक चर्चा का विषय बन गया है. एयरपोर्ट पर हुए हमले के बाद उड़ानों के संचालन और सुरक्षा जांच में ज्यादा सख्ती बरती जा सकती है. जो लोग अक्सर इन देशों की यात्रा करते हैं उन्हें सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक खबरों पर ही भरोसा करें. खाड़ी देशों की सरकारें यह सुनिश्चित करने में लगी हैं कि इस तनाव के बीच आम नागरिकों और प्रवासियों के कामकाज पर कोई बुरा असर न पड़े. फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए भी बातचीत जारी है ताकि व्यापार प्रभावित न हो.