कुवैत में अब तक 146 बार बजी खतरे की घंटी, ईरान के हमलों को लेकर सरकार ने जारी किया अलर्ट
कुवैत में सुरक्षा की स्थिति को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। ईरान की तरफ से जारी सैन्य तनाव के बीच कुवैत में अब तक कुल 146 बार अलर्ट साइरन बजाए जा चुके हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, यह गिनती फरवरी के आखिरी दिनों से शुरू हुई ईरान की आक्रामक गतिविधियों के बाद से है। कुवैत सरकार और सुरक्षा बल लगातार हमलों को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। प्रवासियों और स्थानीय लोगों को सावधान रहने के लिए कहा गया है क्योंकि सुरक्षा एजेंसियां किसी भी खतरे से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर हैं।
कुवैत में बार-बार साइरन बजने की क्या है मुख्य वजह?
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की तरफ से कुवैत में मौजूद सैन्य ठिकानों और रसद केंद्रों को निशाना बनाकर ड्रोन हमले किए जा रहे हैं। कुवैत के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल नासिर बु सालिब ने बताया कि हाल के दिनों में इन अलर्ट्स की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। 26 मार्च को कुवैत की एयर डिफेंस टीम ने दुश्मन की मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया। जब भी आसमान में कोई संदिग्ध गतिविधि दिखती है, तो आम जनता की सुरक्षा के लिए ये साइरन बजाए जाते हैं। कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अन्य आर्थिक सुविधाओं को भी इन हमलों से खतरा पैदा हुआ है।
पिछले कुछ दिनों में हमलों और अलर्ट का पूरा विवरण
कुवैत के रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने लगातार आंकड़ों के जरिए जनता को स्थिति की जानकारी दी है। नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है कि पिछले कुछ दिनों में हालात कैसे रहे हैं:
| तारीख (मार्च 2026) | कुल साइरन अलर्ट | प्रमुख अपडेट |
|---|---|---|
| 23 मार्च | 118 | 24 घंटे में 2 बार अलर्ट जारी हुआ |
| 24 मार्च | 131 | एक दिन में 13 बार साइरन बजाने पड़े |
| 26 मार्च | – | दो ईरानी ड्रोन मार गिराए गए |
| 27 मार्च | 146 | हमलों की शुरुआत से अब तक का कुल आंकड़ा |
कुवैत ने संयुक्त राष्ट्र में भी इस मुद्दे को मजबूती से उठाया है। एंबेसडर नासिर अल-हैन ने साफ कहा है कि इन हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कुवैत अपने बचाव के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत कार्रवाई करने का अधिकार रखता है। वहां रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए सलाह है कि वे धमाकों की आवाज सुनकर घबराएं नहीं और सरकार द्वारा बताए गए सुरक्षित स्थानों की जानकारी रखें। नेशनल गार्ड और कुवैती सेना की टुकड़ियां सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में तैनात कर दी गई हैं ताकि किसी भी बड़े नुकसान को रोका जा सके।




