Kuwait Attack Update: कुवैत में सैन्य कैंप पर मिसाइल और ड्रोन से बड़ा हमला, 10 सैनिक घायल होने के बाद UAE ने दी चेतावनी
कुवैत में एक सैन्य कैंप को निशाना बनाकर बड़ा हमला किया गया है, जिसमें 10 सैनिकों के घायल होने की खबर है। कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि पिछले 24 घंटों में उनके हवाई क्षेत्र में कई मिसाइलें और ड्रोन देखे गए। इस घटना के बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने कुवैत की संप्रभुता का समर्थन करते हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच इस हमले ने सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। यह संघर्ष अब अपने 30वें दिन में प्रवेश कर चुका है।
हमले में क्या-क्या नुकसान हुआ और कुवैत ने क्या कदम उठाए?
कुवैत के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रविवार 29 मार्च 2026 को एक सैन्य कैंप पर मिसाइल और ड्रोन से हमला हुआ। कुवैती सेना ने मुस्तैदी दिखाते हुए करीब 26 ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया। हालांकि, मिसाइलों के मलबे और हमले की वजह से कुछ सरकारी इमारतों और संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है। कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह ने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन बताया है। हमले से जुड़ी मुख्य जानकारी नीचे दी गई है:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| हमले की तारीख | 29 मार्च 2026 |
| घायल सैनिकों की संख्या | 10 सैनिक |
| कुल मार गिराए गए हथियार | 14 मिसाइलें और 12 ड्रोन |
| हमले का प्रकार | हवाई और ड्रोन हमला |
| प्रभावित क्षेत्र | कुवैती सैन्य कैंप |
| संघर्ष की अवधि | 30 दिन |
UAE और अन्य खाड़ी देशों का इस घटना पर क्या कहना है?
यूएई के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि वे कुवैत की सुरक्षा और स्थिरता के लिए हर जरूरी कदम का समर्थन करेंगे। यूएई ने इसे पूरे खाड़ी क्षेत्र की शांति के लिए खतरा माना है। सऊदी अरब, बहरीन, कतर और जॉर्डन जैसे देशों ने भी इस हमले की निंदा की है। यूरोपीय संघ ने भी ईरान से इन हवाई हमलों को तुरंत रोकने और कूटनीति का रास्ता अपनाने का आग्रह किया है। यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने कहा है कि इस संकट को बहुत ही धैर्य के साथ संभाला जा रहा है।
- UAE का रुख: कुवैत की सुरक्षा के लिए पूरी एकजुटता दिखाई है।
- सैनिकों का उपचार: घायल 10 सैनिकों का अस्पताल में इलाज किया जा रहा है।
- क्षेत्रीय असर: इस घटना से खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और व्यापार पर असर पड़ने की आशंका है।
- यूरोपीय संघ: तनाव कम करने और बातचीत शुरू करने की अपील की गई है।




