UAE में आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश, कुवैत सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई को सराहा
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE की सुरक्षा एजेंसियों की जमकर सराहना की है। UAE ने हाल ही में एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पता लगाकर उसे पूरी तरह खत्म कर दिया है। यह नेटवर्क कथित तौर पर हिजबुल्ला और ईरान के समर्थन से काम कर रहा था। कुवैत ने इस मामले में UAE की सुरक्षा और स्थिरता के लिए अपना पूरा समर्थन देने की बात दोहराई है।
UAE में पकड़े गए आतंकी नेटवर्क का क्या मकसद था?
UAE की स्टेट सिक्योरिटी अपरेटस (SSA) ने 20 मार्च 2026 को जानकारी दी कि यह नेटवर्क फर्जी कमर्शियल कंपनियों की आड़ में अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। इस नेटवर्क के मुख्य उद्देश्यों की जानकारी नीचे दी गई है:
- राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में घुसपैठ करना और वित्तीय स्थिरता को नुकसान पहुँचाना।
- फर्जी व्यापारिक गतिविधियों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के लिए पैसा इकट्ठा करना।
- हिजबुल्ला और ईरान से जुड़े बाहरी पक्षों के साथ मिलकर काम करना।
- देश की सुरक्षा और संप्रभुता को चुनौती देने वाली गतिविधियों को बढ़ावा देना।
जांच में यह भी सामने आया है कि पकड़े गए सदस्य एक सोची-समझी योजना के तहत काम कर रहे थे। UAE सरकार ने साफ कर दिया है कि वह देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली किसी भी बाहरी दखलअंदाजी को बर्दाश्त नहीं करेगी।
कुवैत और लेबनान सरकार ने क्या प्रतिक्रिया दी?
कुवैत ने 20 मार्च 2026 को जारी अपने बयान में UAE की चौकसी और कुशलता की तारीफ की। कुवैत ने आतंकवाद के हर रूप को खारिज किया है। इससे पहले कुवैत ने खुद भी 16 और 18 मार्च को हिजबुल्ला से जुड़े कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया था, जो देश के महत्वपूर्ण ढांचों पर हमले की योजना बना रहे थे।
| संबंधित पक्ष | प्रतिक्रिया और स्थिति |
|---|---|
| कुवैत | UAE की सुरक्षा एजेंसियों की सराहना और पूर्ण समर्थन का वादा। |
| लेबनान | आतंकी साजिश की निंदा की और जांच में सहयोग की पेशकश की। |
| हिजबुल्ला | सभी आरोपों को खारिज किया और किसी भी नेटवर्क से इनकार किया। |
| UAE SSA | नेटवर्क के सदस्यों को गिरफ्तार किया और बाहरी फंडिंग का दावा किया। |
लेबनान के विदेश मंत्रालय ने भी इस घटना की निंदा की है और याद दिलाया कि उनकी सरकार ने पहले ही हिजबुल्ला की सैन्य गतिविधियों पर रोक लगा रखी है। दूसरी तरफ हिजबुल्ला ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताया है। यह घटना खाड़ी देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख को दर्शाती है।




